चरखी दादरी। शहर की कॉलोनियों के बाहरी क्षेत्र में पिछले दो दशक से रह रहे करीब 1500 लोग इस बार निकाय चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। सरकार की ओर से इस संबंध में पहले ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं, जिसके आधार पर नगर परिषद की ओर से पिछले साल सितंबर में इन्हें संबंधित गांव में अपना वोट बनवाने के लिए नोटिस दिए गए थे। अहम बात यह है कि जिन कॉलोनियों में ये रहते हैं उनमें शहरी बूथ लगते हैं और इसके बावजूद इस बार शहरी सरकार चुनने में ये अपने मताधिकारी का प्रयोग नहीं कर पाएंगे।
करीब 25 से 30 साल से गांवों से आकर शहर में रहे बसे करीब पंद्रह सौ मतदाताओं के नगर परिषद द्वारा वोट काट दिए जाने और गांवों में पंचायत चुनावों की वोटर लिस्ट में भी नाम दर्ज नहीं होने से दुविधा की स्थिति बनी हुई है। पिछले दिनो नगर परिषद की ओर से शहर के सभी वार्डों से हजारों की संख्या में पुराने वोट नगर परिषद मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। अब यह लोग न तो पंचायत चुनाव में मतदान कर सकते हैं और न ही नगर परिषद चुनाव में मतदान कर पाएंगे।
शहर में 21 वार्ड हैं जिनमें 42,635 मतदाता हैं। शहर की नई एवं बाहरी कॉलोनियां तो गांवों से आकर बसे लोगों से आबाद हुई हैं। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का वोट पहले गांवों में पंचायती चुनाव मतदाता सूची में दर्ज था लेकिन जब लंबा समय शहर में रहते बीत गया तो इन लोगों ने पंचायती चुनाव मतदाता सूची से अपना नाम कटवाकर शहर में नगर परिषद मतदाता सूची में दर्ज करवा लिया था। ये लोग नगर परिषद चुनाव में कई योजना मतदान में भाग ले चुके हैं लेकिन अब नगर परिषद मतदाता सूची से इनका नाम काट दिए जाने पर दुविधा एवं चिंता की स्थिति बन गई है। अब ये लोग न तो आने वाले पंचायत चुनाव और न ही नगर परिषद चुनाव में मतदान कर पाएंगे। जबकि विधानसभा व लोकसभा चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में इनका नाम दर्ज है। इनमें अधिकतर लोग 25 से 30 साल से शहर में ही रह रहे हैं और मकान बना रखे हैं।
- वार्ड-3 में कटे सबसे अधिक वोट
अकेले वार्ड 3 में करीब 870 मतदाताओं के नाम नगर परिषद की सूची से कटे हैं। इसी प्रकार अन्य वार्डों में भी कमोबेश यही स्थिति है। वार्ड 3 निवासी पूर्व सैनिक धर्मबीर सिंह का कहना है कि प्रशासन को इसका कुछ समाधान निकालना चाहिए। वे तीन से चार योजना नगर परिषद चुनाव में मतदान कर चुके हैं।
- वोट कटने से उम्मीदवारों में भी बेचैनी
-इन वार्डों के निवर्तमान पार्षद एवं चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों में भी बेचैनी बनी हुई है। इनका तर्क है कि इतने समय बाद मतदाता सूची से वोट काट देना तर्कसंगत नहीं है। इन लोगों को पंचायत या नगर परिषद में से किसी एक चुनाव में मतदान का तो अधिकार मिलना चाहिए। निवर्तमान पार्षदों का कहना है कि संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों को इस पर पुनर्विचार कर कोई समाधान निकालना चाहिए।