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35 हजार किसानों ने कराया पंजीकरण, एक अप्रैल से होगी खरीद

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चरखी दादरी। रबी सीजन में अनाज की सरकारी खरीद करवाने के लिए अब तक जिला के 35 हजार किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। सरकार हर साल एक अप्रैल से सरकारी खरीद शुरू करती है। इस बार जिला में सरसों की बिजाई का रकबा बढ़ा है। किसान 15 फरवरी तक पोर्टल पर अपनी फसल का पंजीकरण करवा सकते हैं।
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जिला में मौजूदा रबी फसल सीजन में 1.80 लाख एकड़ में किसानों ने सरसों, गेहूं, जौ, मेथी, बरसम, गन्ना, चना व सब्जियों की बिजाई कर रखी है। सबसे ज्यादा रकबा सरसों का 70 हजार एकड़ है। उसके बाद गेहूं का रकबा करीब 40 हजार एकड़ है। जौ का एरिया भी करीब तीन हजार एकड़ है। पिछले साल सरसों का बिजित रकबा 54 हजार 300 एकड़ था।
सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हर साल सरसों व गेहूं की सरकारी खरीद करती है। पिछली बार सरसों की पैदावार कम होने की वजह से इसका भाव अधिकतम 8300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था जबकि सरकारी रेट 4650 रुपये प्रति क्विंटल है ऐसे मेें किसानों ने सरसों को सरकारी खरीद केंद्रों में बेचना उचित नहीं समझा। किसानों ने ऑयल मिल व अन्य प्रतिष्ठानों में खुले बाजार मेें सरसों की बिक्री थी। इस समय भी सरसों के भाव 7000 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा बना हुआ है लेकिन इस बार सरसों की पैदावार बंपर होने का अनुमान है क्योंकि बिजाई का रकबा बढ़ गया है।
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इस समय मेरी फ सल, मेरा ब्योरा पोर्टल खुला है ऐसे में किसान 15 फरवरी तक पोर्टल पर बिक्री के लिए पंजीकरण करवा सकते हैं। अब तक जिला में 35 हजार किसान इस पोर्टल पर पंजीकरण करवा चुके हैं। 15 फरवरी तक यह आंकड़ा दो से तीन हजार और बढ़ने की संभावना है। पंजीकरण के बाद ही सरकार टोकन सिस्टम से सरकारी खरीद करती है। खरीद के बाद भुगतान राशि किसान के बैंक में पहुंचती है। जमीन का डाटा ऑनलाइन होने पर किसान अपने हर खेत का खसरा व खतूनी नंबर के जरिये पंजीकरण करवा सकता है। इसके लिए उसे पटवारी आदि से वेरिफाई करवाने की भी जरूरत नहीं है। पूरा डाटा पोर्टल पर फैमिली आईडी से जोड़ रखा है। पंजीकरण करने से पहले फैमिली आईडी अंकित करनी होती है उसके बाद जमीन का पूरा डाटा स्वत: ही खुल जाता है।
किसान 15 फरवरी तक पंजीकरण करवा सकते हैं। सरकार अप्रैल प्रथम सप्ताह मेें सरकारी खरीद शुरू करती है। जमीन का डाटा पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध है। किसी प्रकार की दिक्कत आने पर कृषि विभाग अधिकारियों से परामर्श लिया जा सकता है।
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डॉ. जितेंद्र सिहाग, तकनीकी सहायक अधिकारी, कृषि विभाग
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