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पहाड़ दरकने का दर्द: तीन बच्चों का पेट भरने के लिए मजदूरी कर रहा था धर्मबीर, मासूम बार-बार बुआ से पूछ रहे... पापा कब आएंगे

Tue, 04 Jan 2022 12:58 AM IST
भूपेंद्र सिंह संजय वर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)

सार

पहाड़ दरकने के दर्दनाक हादसे में रोहतक के धर्मबीर की मौत हो गई। तीन मासूम बच्चे अनाथ हो गए। धर्मबीर की पत्नी की पांच साल पहले मौत हो चुकी थी। वह तीन बच्चों का पेट भरने के लिए मजदूरी करता था। 
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मृतक धर्मबीर के परिजनों के ब्यान दर्ज करते तोशाम थाना पुलिस अधिकारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के भिवानी के डाडम में पहाड़ दरकने की दर्दनाक घटना ने तीन मासूम बच्चों की जिंदगी पहाड़ से भी भारी कर दी। इन मासूम बच्चों की जिंदगी पर तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा, जब उनके पिता की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई।

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पांच साल पहले ये मासूम अपनी मां को खो चुके थे, जबकि हादसे के बाद पिता ने भी दुनिया से अलविदा कह दिया। सिर से पिता का साया उठा तो उम्र भर के लिए अनाथ होने का गम भी उनकी जिंदगी से जुड़ गया। ये तीनों बच्चे अपनी बुआ के पास रह रहे हैं। मासूम बच्चे बार-बार पूछ रहे हैं कि बुआ पापा घर कब आएंगे, लेकिन बुआ इन बच्चों को क्या बताती कि अब उनके पिता कभी नहीं लौटेंगे। रविवार को डाडम हादसे में मृत मिले पांचवें व्यक्ति रोहतक जिले के गांव भालौठ निवासी 52 वर्षीय धर्मबीर के शव का सोमवार को नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ। 

भालौठ निवासी 52 वर्षीय धर्मबीर डाडम की खान नंबर बीटी-37-38 में मुंशी के हेल्पर के तौर पर काम करता था। धर्मबीर तीन बच्चों का पिता था। उसका बड़ा लड़का 12 वर्षीय मयंक, दस साल की बेटी वर्षा व आठ साल की छोटी बेटी वंशिका है। धर्मबीर की पत्नी सजनी पांच साल पहले मौत हो चुकी है।
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पत्नी की मौत के बाद धर्मबीर के कंधों पर ही तीनों बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ पड़ी थी। वह रोजीरोटी कमाता और तीनों बच्चों की देखभाल भी करता। इस जिम्मेदारी में उसका हाथ बटाने के लिए उसकी बहन राजबाला ने मदद की। राजबाला गांव थिलौड़ में रहती है।

राजबाला के पास ही तीनों बच्चे रहने लगे और धर्मबीर रोजाना खान में जाकर मेहनत मजदूरी का काम करने लगा। बच्चों की जिंदगी अपने जीवन के गम भुलाकर हंसी खुशी आगे बढ़ ही रही थी कि अचानक उनकी जिंदगी में मुसीबतों का पहाड़ अचानक आ गिरा। जिसके नीचे न केवल उनके सभी अरमान दब गए, बल्कि किस्मत ने भी दगा दे दिया। ये तीनों एक ही झटके में अनाथ हो गए। 

पांच भाइयों में सिर्फ एक बचा

धर्मबीर पांच भाइयों व चार बहनों के भरे पूरे परिवार का हिस्सा था। उनके तीन भाइयों की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि उसका छोटा भाई श्रीकृष्ण बचा है। उनकी चार बहनों में तीन बहनें हैं, जबकि एक बहन भी जा चुकी है। पारिवारिक तौर पर भी धर्मबीर पहले ही काफी टूट चुका था, लेकिन बच्चों की खातिर वह अपनी जिंदगी की गाड़ी खींच रहा था कि कभी तो वक्त करवट बदलेगा और फिर से उसके बच्चों की जिंदगी पटरी पर लौट आएगी। मगर इस गाड़ी में अचानक ही पहाड़ आगे दीवार बनकर खड़ा हो गया। 

एक साल से करता था कंपनी में मजदूरी

धर्मबीर के भाई श्रीकृष्ण का कहना है कि उसका भाई भालौठ से आकर अपनी बहन के यहां थिलौड़ में रहने लगा था। तीनों बच्चे भी उसी के साथ थे। करीब एक साल से वह खनन कंपनी में काम करता था। उसका काम मुंशी के हेल्पर का था। इसलिए वह खान में अंदर ही रहता था। उसकी ड्यूटी शुरू हो गई थी, इसलिए मजदूरों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया था। इसी दौरान अचानक यह हादसा हुआ। 

मां ने खो दिया अपना लाल

पहाड़ दरकने के दर्दनाक हादसे में पंजाब के होशियारपुर के गांव कोई निवासी दिनेश दत्त भी दो भाइयों में छोटा था। उसकी मां दिल की मरीज हैं। उसने अपना लाल खो दिया, मगर परिजनों ने अभी इस दिल दहला देने वाले हादसे के बारे में उसे नहीं बताया। उन्हें डर है कि कहीं बेटे के चले जाने के गम में वह भी हृदयाघात से न घिर जाए, क्योंकि जिंदगी के आखिरी पड़ाव में बेटे का अपनी आंखों के सामने यूं चले जाना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय सदमा है।

वारिसों को दिए शव

धर्मबीर के शव का नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया है। मृतक के परिजनों के भी बयान पुलिस ने दर्ज किए हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव उनके वारिसों के सौंप दिए गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है। - सुखबीर जाखड़, एसएचओ, तोशाम पुलिस थाना।

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