हरियाणा के भिवानी के डाडम में पहाड़ दरकने की दर्दनाक घटना ने तीन मासूम बच्चों की जिंदगी पहाड़ से भी भारी कर दी। इन मासूम बच्चों की जिंदगी पर तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा, जब उनके पिता की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो गई।
धर्मबीर पांच भाइयों व चार बहनों के भरे पूरे परिवार का हिस्सा था। उनके तीन भाइयों की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि उसका छोटा भाई श्रीकृष्ण बचा है। उनकी चार बहनों में तीन बहनें हैं, जबकि एक बहन भी जा चुकी है। पारिवारिक तौर पर भी धर्मबीर पहले ही काफी टूट चुका था, लेकिन बच्चों की खातिर वह अपनी जिंदगी की गाड़ी खींच रहा था कि कभी तो वक्त करवट बदलेगा और फिर से उसके बच्चों की जिंदगी पटरी पर लौट आएगी। मगर इस गाड़ी में अचानक ही पहाड़ आगे दीवार बनकर खड़ा हो गया।
धर्मबीर के भाई श्रीकृष्ण का कहना है कि उसका भाई भालौठ से आकर अपनी बहन के यहां थिलौड़ में रहने लगा था। तीनों बच्चे भी उसी के साथ थे। करीब एक साल से वह खनन कंपनी में काम करता था। उसका काम मुंशी के हेल्पर का था। इसलिए वह खान में अंदर ही रहता था। उसकी ड्यूटी शुरू हो गई थी, इसलिए मजदूरों के आने का सिलसिला भी शुरू हो गया था। इसी दौरान अचानक यह हादसा हुआ।
पहाड़ दरकने के दर्दनाक हादसे में पंजाब के होशियारपुर के गांव कोई निवासी दिनेश दत्त भी दो भाइयों में छोटा था। उसकी मां दिल की मरीज हैं। उसने अपना लाल खो दिया, मगर परिजनों ने अभी इस दिल दहला देने वाले हादसे के बारे में उसे नहीं बताया। उन्हें डर है कि कहीं बेटे के चले जाने के गम में वह भी हृदयाघात से न घिर जाए, क्योंकि जिंदगी के आखिरी पड़ाव में बेटे का अपनी आंखों के सामने यूं चले जाना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय सदमा है।
धर्मबीर के शव का नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया है। मृतक के परिजनों के भी बयान पुलिस ने दर्ज किए हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव उनके वारिसों के सौंप दिए गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है। - सुखबीर जाखड़, एसएचओ, तोशाम पुलिस थाना।