भिवानी। लघु चिड़ियाघर में बब्बर शेर के दो नन्हें शावक अब मां के दूध और सीख से अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाने के लिए तैयार होने लगे हैं। ये दोनों शावक पूरे पांच माह के हो गए हैं। इनकी सेहत से बब्बर शेर की इस प्रजाति को भी बचाए रखने के भी अच्छे संकेत मिले हैं। वहीं, इन दोनों पर अब अपनी दुर्लभ प्रजाति को बचाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
यह भी दुर्लभ संयोग है कि दोनों शावक जन्म के बाद से ही अपनी मां के साथ पूरी तरह से सुरक्षित हैं। अधिकतर चिड़ियाघरों में छोटे शावकों का पालन पोषण प्राकृतिक माहौल में नहीं होता है। उन्हें बाहर के दूध और खुराक पर जिंदा रखा जाता है। हालांकि भिवानी के लघु चिड़ियाघर में ये दोनों शावक खुशकिस्मत और खुशनसीब भी हैं, जिन्हें अपनी मां का प्यार और दुलार दोनों मिल रहे हैं। संवाद
इंदौर से आए सिंबा का बन गया परिवार, शिवा होगा अब लघु चिड़ियाघर से बाहर
भिवानी के लघु चिड़ियाघर में बब्बर शेर के बाड़े में कुछ साल पहले एक ही मादा के तीन शेर थे, जिसमें नर बब्बर शेर अर्जुन और उसकी दो बहनें मादा शेरनी गीता और सुधा। भिवानी से मादा शेरनी सुधा को रोहतक के लघु चिड़ियाघर में भेज दिया गया है, जबकि उनके भाई अर्जुन को इंदौर के चिड़ियाघर में भेजा गया। उसके बदले वहां से नर बब्बर शेर शिवा को यहां लाया गया था। हालांकि नर बब्बर शेर ने मादा शेरनी गीता से नजदीकियां नहीं बढ़ाईं। इसके बाद इंदौर से ही एक जनवरी 2022 को नर बब्बर शेर सिंबा को यहां लाया गया। सिंबा से मादा शेरनी गीता गर्भवती हुई और उसने तीन शावकों को पिछले साल दो अक्तूबर को जन्म दिया। इसमें से अब दो शावक पांच माह के हो गए हैं, जो कि बब्बर शेर की नई पीढ़ी के तौर पर जाने जाएंगे और अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाएंगे। अब नर बब्बर शेर शिवा को दूसरे चिड़ियाघर भेजा जाएगा। इसकी तैयारियां भी अब होने लगी हैं।
लघु चिड़ियाघर में मादा शेरनी गीता के दो शावक पांच माह के हो चुके हैं। ये सुखद पहलू है कि ये दोनों शावक अपनी मां के दूध और नेचुरल खुराक से पूरी तरह से स्वस्थ हैं, जिन्हें जल्द खुले बाड़े में छोड़ा जाएगा। यहां नर बब्बर शेर शिवा को दूसरे चिड़ियाघर भेजा जाएगा। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। दोनों शावकों की नियमित स्वास्थ्य जांच भी कराई जा रही है और इनके खानपान का भी खास ध्यान रखा जा रहा है।
-मनवीर सिंह, इंचार्ज, चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल लघु चिड़ियाघर भिवानी।