रमेश ने बताया कि ई-रिक्शा से इतने ही रुपये मिल पाते हैं कि परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता है। उन्होंने लोगों से पैसे उधार लेकर किसी तरह से बेटी नीलम को तैयारी के लिए कोचिंग कराई। बेटी ने भी इस बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया। उन्होंने कहा कि बेटी को यही शिक्षा दी है कि वह गरीब और जरूरतमंदों को न्याय दिलाए।
अन्याय के खिलाफ लड़ूंगी लड़ाई
नीलम ने कहा कि पुलिस की नौकरी ऐसी फील्ड है, जहां अन्याय से पीड़ित लोग पहुंचते हैं। मेरा सपना है कि मैं उन लोगों के लिए अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ूं। गरीब और पीड़ित लोगों को न्याय दिलाऊं। मेरे परिवार द्वारा दिए गए संस्कारों पर सदा खरा उतर सकूं।
बेटी अफसर बन गई बस यही पता है
नीलम की मां प्रोमिला का कहना है कि उसे नहीं पता है कि सब इंस्पेक्टर कितना बड़ा अफसर होता है। मुझे तो बस यही पता है कि मेरी बेटी अफसर बन गई है। मैंने भी बेटी से कहा है कि पुलिस अफसर पर लोग भरोसा करते हैं। उसको कभी कमजोर मत होने देना।