भिवानी। अणुव्रत समिति द्वारा अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का आगाज तेरापंथ भवन में साम्प्रदायिक सौहार्द दिवस के रूप में किया गया। साध्वी सरोज कुमारी ने कहा कि आचार्य तुलसी ने कहा था कि आत्मशुद्धि साधनम धर्म अर्थात धर्म आत्मशुद्धि का साधन है।
उन्होंने कहा कि सभी धर्म अच्छे हैं लेकिन साम्प्रदायिकता बुरी है। ब्रह्मकुमारी सुमित्रा ने कहा कि साम्प्रदायिकता अंग्रेजों की देन है और इससे समाज में विघटन होता है। हरियाणा दिव्यांग आयुक्त रामकुमार मक्कड़ ने कहा कि अणुव्रत और आचार्य तुलसी से उनका पुराना रिश्ता है। अणुव्रत की आचार संहिता मानवता के कल्याण और सर्वधर्म समभाव की आचार संहिता है।
उन्होंने कहा कि अणुव्रत के नियमों पर चलने से विश्वशांति हो सकती है। बाबा जगन्नाथ ने कहा कि सभी मनुष्यों की आत्मा में परमात्मा का वास है और सभी धर्मों का आदर करना चाहिए। साध्वी सोमप्रभा ने कहा कि मनुष्य जाति एक है और अच्छी बात जहां से भी मिल जाए उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। कार्यक्रम का शुभारंभ सुनीता नाहटा द्वारा अणुव्रत गीत से किया गया। संयोजन समिति के अध्यक्ष रमेश बंसल ने किया।
इस अवसर पर आस्था स्पेशल स्कूल के दिवयांग बच्चों ने भी साध्वी का आशीर्वाद ग्रहण किया। समिति द्वारा अतिथियों का अणुव्रत पट्ट एवं साहित्य द्वारा सम्मान किया गया। इस अवसर पर विजय शर्मा, सुमन शर्मा, रमेश जैन उपासक, माणिक चंद नाहटा, नवीन नाहटा, सारिका जैन, देवीचंद जैन और शुभम जैन उपस्थित थे। संवाद