भिवानी। पशु पालन एवं डेयरी विभाग द्वारा श्राद्ध की अमावस्या पर गायों की असमय मृत्यु से बचाने की मुहिम रंग लाई। पिछले वर्षों की तुलना में तली हुई चीजें खाने से होने वाली मृत्यु दर में बहुत कमी आई है। पशु पालन एवं डेयरी विभाग ने सप्ताह भर पहले से ही लोगों को जागरूक किया था। लोगों ने भी विभाग की अपील पर अमल किया और गायों को एसिडोसिस से बचाने मेें अपना सहयोग दिया।
नगर परिषद ने भी तली हुई चीजें वार्ड के हिसाब से कैंटरों में इकट्ठी करने का कार्य किया और गायों को मृत्यु का ग्रास बनने बचाया। पशु पालन विभाग के उप निदशेक डा. सुखदेव राठी ने बताया कि उन्होंने अमावस्या के दिन छुट्टी वाले दिन भी सभी पशु अस्पतालों को खोलने के आदेश दिए थे। भिवानी के सभी पशु चिकित्सकों ने इन छुट्टियों मेें अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया व एसिडोसिस से पीड़ित 66 बीमार गायों का उपचार किया व 63 गायें ठीक हो गई।
इस दौरान एसिडोसिस से एक भी गाय को मरने नहीं दिया गया। तीन गायों की एमरजेंसी सर्जरी (रूमनोटोमी) करनी पड़ी। सर्जरी में उनके पेट से कई किलो पॉलीथिन व कचरा निकला। डा. राठी ने बताया कि दो गायों की मृत्यु पेट में पॉलीथिन व कचरा होने की वजह से सास लेने में दिक्कत होने पर हुई है। इस मौके पर शहर में डॉ. सोनू वर्मा, डॉ. राज कुमार काल्हेर, डॉ. सुनील बिसला, डॉ. सुनील बुंदेला, डॉ. दिनेश, डॉ. सुभाष, डॉ. अमित पूनिया ने दिन रात मेहनत करके गायों का इलाज किया और उन्हें एसिडोसिस से मरने से बचाया। इस अवसर पर वीएलडीए रविंद्र कुमार, अमित, सुनील, पवन, संदीप, रण सिंह तंवर ने चिकित्सकों के साथ पूर्ण सहयोग दिया। संवाद