भिवानी। सुबह नौ बजे जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की तो क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी एक-दूसरे को फोन कर बधाइयां देने लगे। किसानों ने एक-दूसरे को जलेबियां खिलाकर आंदोलन की जीत का जश्न मनाया। वहीं दूसरी ओर यह भी साफ कर दिया कि आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा। किसान नेताओं ने कहा कि उन्हें सरकार पर भरोसा नहीं है। जब तक संसद में संवैधानिक तरीके से कानूनों को वापस नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उसके बाद अन्य मांगों को लेकर रूपरेखा बनाई जाएगी और संयुक्त किसान मोर्चा आंदोलन पर फैसला करेगा।
शुक्रवार सुबह कितलाना टोल से हांसी के लिए किसानों का जत्था रवाना होना था। इसी दौरान किसानों को कृषि कानून वापसी की घोषणा प्रधानमंत्री द्वारा किए जाने सूचना मिल गई। इस पर किसानों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने राहत की सांस ली। उन्होंने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया और गले लगकर बधाई दी। इस दौरान कई किसान भावुक भी हो गए। इसके बाद जोश के साथ हांसी महापंचायत के लिए रवाना हुए।
25 दिसंबर से शुरू हुआ था धरना
कितलाना टोल पर किसानों धरना 25 दिसंबर, 2020 को शुरू हुआ था। उस दिन सांसद धर्मबीर सिंह को कितलाना टोल से गुजरकर भिवानी जाना था। किसान नेता राजू मान ने बताया कि किसान भारी संख्या में उनका विरोध करने पहुंचे और रास्ता रोक दिया। सांसद धर्मबीर सिंह अपना रास्ता बदलकर भिवानी पहुंच गए मगर किसान वहीं धरना लगाकर बैठ गए और भिवानी और चरखी दादरी जिले के किसानों ने आंदोलन में अपनी आहुति देनी शुरू कर दी।
दुख और तकलीफों के सिवाय कुछ नहीं मिला
किसान नेता कॉमरेड ओमप्रकाश ने कहा कि ये कानून लाना सरकार का बहुत ही गलत फैसला था। इस फैसले से दुख और तकलीफों के सिवाय किसी को कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कानून वापस होने पर हालात पहले जैसे ही हो जाएंगे, मगर इसके लिए सैकड़ों किसानों को शहादत देनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जब तक अन्य मुद्दों पर सरकार से संयुक्त किसान मोर्चा की सहमति नहीं होती है तब तक वे आंदोलन को वापस नहीं लेंगे।
हांसी के लिए रवाना हुआ किसानों का जत्था
कितलाना टोल से किसानों का एक बड़ा जत्था शुक्रवार को हांसी में होने वाली किसान महापंचायत के लिए रवाना हुआ। जिसमें दादरी से निर्दलीय विधायक और सांगवान खाप के प्रधान सोमबीर सांगवान, सांगवान खाप के सचिव नरसिंह सांगवान डीपीई, किसान नेता गंगाराम श्योराण, श्योराण खाप के प्रधान बिजेंद्र बेरला, किसान सभा से कॉमरेड ओमप्रकाश, बलबीर बजाड़, मास्टर ताराचंद चरखी, सूरजभान सांगवान, सुरेंद्र कुब्जानगर, दिलबाग ढुल, रामफल देसवाल, नरेंद्र धनाना, सरोज श्योराण, सुशीला घणघस मुख्य रूप से शामिल थे। जत्थे में शामिल किसानों ने कहा कि जब तक कुलदीप राणा के दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होता तब तक हम अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
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यह जीत किसान और मजदूरों की एकता की है। सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं मगर जब तक संविधानिक प्रक्रिया से कानूनों को वापस नहीं लिया जाता तब तक हमारा आंदोलन और धरने जारी रहेंगे।
- राजू मान, किसान नेता, कितलाना टोल
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आंदोलन में 700 किसानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। उन किसानों को मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए। आंदोलन के आगे का फैसला संयुक्त किसान मोर्चा के निर्देश पर किया जाएगा।
- बलवंत नंबरदार, किसान नेता और फौगाट खाप के प्रधान
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यह आंदोलन सिर्फ किसी कानूनों को वापस लेने को लेकर नहीं था। एमएसपी की गारंटी और अन्य कई मांगे अभी सरकार द्वारा मानी जानी बाकी है। सरकार उन मांगों पर भी जल्द निर्णय ले। अभी हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
- नरसिंह डीपीई, सचिव, सांगवान खाप-40
भाजपा सरकार किसान हितैषी है। पीएम ने हमेशा किसानों के हित के फैसले लिए हैं। यह कृषि कानून भी किसानों के हित के लिए लाए गए थे। मगर हरियाणा और पंजाब के किसानों को यह कानून रास नहीं आए। किसानों के मन की बात को रखते हुए प्रधानमंत्री ने कानूनों को वापस लिया। प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया है कि किसानों के हित में एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगा। उसमें सरकार के मंत्रियों, बड़े किसान नेताओं, विपक्ष के बड़े नेताओं और कृषि विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। उस आयोग द्वारा किसानों के हित में फैसले लिए जाएंगे। मोदी के कानून वापस लेने के बाद किसानों से अपील है की वह आंदोलन समाप्त करें और अपने घर वापसी करें।
- जेपी दलाल, कृषि मंत्री, हरियाणा सरकार