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कोरोना संक्रमण की चपेट में आए 350 से अधिक उद्योग अब तक नहीं हुए स्वस्थ

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भिवानी औद्योगिक इकाई। संवाद - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। कोरोना संक्रमण की चपेट में आए जिले के 350 से अधिक उद्योग अब तक पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुए हैं। यानी उनका काम धंधा पूरी तरह पटरी पर नहीं आया है। वहीं, नए व्यापार को शुरू करने के प्रति भी लोगों का रुझान कम हुआ है।
जिले में अब तक कोई नया बड़ा उद्योग अस्तित्व में नहीं आया है। कई छोटे व्यापारी तो कोरोना की मार नहीं झेल पाए और अपना कामधंधा ही बंद कर चुके हैं। 200 से अधिक जीएसटी नंबर भी सरेंडर हुए हैं। सबसे अहम बात तो यह है कि पहले से चल रही औद्योगिक इकाइयों में एक काम बंद कर दूसरा काम शुरू करने वाले व्यापारियों को एनओसी लेने में ही पसीने छूट रहे हैं।
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भिवानी जिले में करीब 850 से अधिक मध्यम व बड़े उद्योग हैं। इसके अलावा 350 उद्योग ऐसे हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति कोविड संक्रमण के बाद लड़खड़ा गई है, जिन्हें संभलने में भी अभी काफी वक्त लगेगा। हरियाणा सरकार ने 2020 नई उद्योग नीति भी बनाई है। नई उद्योग नीति में नए उद्योगों की शुरूआत करने के लिए भी सब्सिडी और 25 लाख रुपये तक का लोन देने का प्रावधान किया है। इसके बावजूद भी व्यापारी नए उद्योगों के प्रति अपना रुझान नहीं दिखा रहे हैं। हालांकि कोरोना के बाद दम तोड़ चुके छोटे व्यापारियों को फिर से अपना कारोबार खड़ा करने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू हुई हैं।
नए विभाग के पास नहीं पुराने उद्योगों से जुड़े आंकड़े, योजनाओं का कैसे मिलेगा लाभ
जिला उद्योग केंद्र के माध्यम से उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही थीं। हरियाणा सरकार की नई उद्योग नीति के बाद एमएसएमई नाम से अलग विभाग बना दिया, जिसका मुख्यालय भी पंचकूला में बना है। इस नए विभाग के पास पुराने उद्योगों से जुड़ा कोई आंकड़ा अब तक नहीं आया है। वहीं, नए विभाग के पास ही फूड व माइक्रो बिजनेस से जुड़ी सभी योजनाएं आई हैं। जिनके माध्यम से बेरोजगार युवाओं को खुद का नया कारोबार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना है। रेडीमेड कपड़ों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भी नई नीति में काफी प्रावधान किया है। बावजूद इसके लोग अब इन नीतियों से ही अनजान हैं।
कोरोना काल में बंद रही इकाइयों को नहीं मिली बिजली बिल में कोई राहत
कोविड के दौरान कई महीनों तक उद्योग तालाबंदी के शिकार रहे। इस दौरान उद्योगों में बिजली बिलों को लेकर भी कोई राहत नहीं मिली। हालांकि उत्पादन बंद रहा तो ज्यादा बिजली भी खर्च नहीं हुई, लेकिन बंद पड़े उद्योगों का स्लैब रेट के हिसाब से बिजली का बिल भी भारी भरकम ही थमाया गया था। जिसमें निगम की तरफ से व्यापारियों को कोई राहत नहीं मिली।
जीएसटी नंबर लेने पर भी विभाग लगा रहा आपत्ति
सीए ललित अग्रवाल ने बताया कि ज्यातार व्यापारी जीएसटी नंबर ले रहे हैं, लेकिन उनके ऑनलाइन आवेदनों पर आयकर विभाग आपत्ति लगा रहा है। यह आपत्ति बेवजह की है, जबकि आयकर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी के आवेदनों में रेंट एग्रीमेंट अपलोड कर रहे हैं। मगर यह एग्रीमेंट संपत्ति मालिक की तरफ से नहीं दिया जा रहा है, जबकि मालिक के बिजली बिल की कॉपी लगाना अनिवार्य है। इसी वजह से आपत्ति लगा रहे हैं। (संवाद)
हमारा विभाग हाल ही में जिला उद्योग केंद्र से अलग हुआ है। अभी ज्यादातर रिकॉर्ड उद्योग केंद्र कार्यालय के पास ही हैं। प्रधानमंत्री रोजगार योजनाओं सहित अनेक प्रोत्साहन योजनाएं नई उद्योग नीति में शामिल हैं, जिनको लेकर नए व्यापार खड़े करने में व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
-संदीप, डिप्टी डायरेक्टर, एमएसएमई भिवानी।
नए उद्योगों का पंजीकरण उद्योग पोर्टल पर ऑनलाइन किया जा रहा है। लगातार रजिस्ट्रेशन का काम जारी है। रजिस्ट्रेशन को लेकर कोई पेचीदगी नहीं हैं। व्यापारियों को प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ पहुंचाने का दायित्व अब एमएसएमई विभाग के पास है।
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-राजेश खेड़ा, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र भिवानी।
कोरोना के बाद लगभग सभी उद्योगों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं, हालांकि अधिकतर उद्योग फिर से चालू हो गए हैं। उद्योगों को कच्चे माल और तैयार माल में महंगाई का सामना भी करना पड़ रहा है, जबकि सरकार की तरफ से राहत नहीं मिली है।
-धर्मबीर नेहरा, प्रधान, जिला उद्योग संघ भिवानी।
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