श्री अनन्त प्रेम मंदिर में चल रही कार्तिक मास की कथा में प्रवचन करते गीता महाराज।
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ऐतिहासिक श्री अनंत प्रेम मंदिर में चल रही कार्तिक मास के पावन सत्संग की बेला में मंदिर की परमाध्यक्ष गीता देवी महाराज ने गोपाष्टमी का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि गोपाष्टी के दिन गाय की पूजा करने से 33 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा का फल मिलता है। आज के दिन कार्तिक शुक्ल अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण गउओं के पालक बने थे। इससे पूर्व वह बछड़े चराया करते थे। इसलिए यह अष्टमी गोपाष्टमी कहलाती है।
उन्होंने कहा कि गोपाष्टमी पर मनोकामना पूर्ण करने के लिए गायों का पूजन कर प्रदक्षिणा करनी चाहिए और गायों के पीछे चलना चाहिए। गिरीराज महाराज की परिक्रमा मार्ग पर जो राधा कुंड है, उसमें आज के दिन स्नान करके जो श्रीकृष्ण का पूजन करता है, उसके समस्त पापों का नाश होता है। गीता देवी महाराज ने कहा कि गोपाष्टमी को एक गाय के दान से असंख्य गायों के दान का फल मिलता है।
उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि जीव को गाय का दूध ही पीना चाहिए। इस अवसर पर गीता देवी महाराज व मंदिर की समस्त देवियों ने प्रेम मंदिर की गोशाला में जाकर गायों का पूजन किया। इस दौरान उनके गाए भजनों गोविन्द मेरो है, गोपाल मेरो है, श्री बांके बिहारी नंद लाल मेरो है व श्रीराधे गाविंदा, मन भज ले हरि का प्यारा नाम है... पर भक्तजन झूम उठे।