मुलाना। गांव धीन में बना प्राचीन शिव मंदिर भक्तों में आस्था का केंद्र बना हुआ है। पहले यहां केवल खुले में शिवलिंग स्थापित था। जहां सांपों का जोड़ा रहता था। मान्यता है कि यहां हर मनोकामना पूर्ण होती है। शिवरात्रि व सावन माह में मंदिर में विशेष कार्यक्रम आयोजित करवाए जाते हैं। दूरदराज से भक्त मंदिर में आकर जलाभिषेक करते हैं।
बराड़ा निवासी डॉ. हरीश मोदगिल ने बताया कि वह शाहाबाद के रहने वाले हैं। उनका एक लड़का कृष्ण शर्मा साधु बन गया था। धीन गांव में जहां शिवलिंग स्थापित था, वहां वह और एक निर्वाणी बाबा रहते थे। उन्होंने बताया कि एक दिन धीन निवासी पूर्ण चंद ने उन्हें बुलाया था। उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी की वसीयत उनके नाम कर दी थी। वह जैसे ही बराड़ा अपने घर वापस पहुंचे तो एक सांप ने काट लिया। इसके बाद कई बार ऐसा हुआ। उन्हें सपने में सांप दिखाई देते थे। उसके बाद किसी ज्योतिष से इन सब हादसों के बारे में पूछा तो बताया गया कि उन्हें धीन गांव में शिव मंदिर बनवाना पड़ेगा। जिसके बाद उन्होंने वर्ष 1980 में गांव में शिव मंदिर का निर्माण करवाया। तब से उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। इसके बाद सांप का जोड़ा भी अंतर्ध्यान हो गया।
बहुत पहले यहां एक सांपों का जोड़ा रहता था। जिसने किसी को कभी कोई हानि नहीं पहुंचाई। एक बाबा यहां रहते थे। हरीश मोदगिल के साथ कई बार ऐसी घटनाएं हुईं। उन्होंने मंदिर बनवाया।
- मीत सिंह नंबरदार, कैशियर मंदिर कमेटी, धीन।
हर वर्ष शिवरात्रि के उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन किया जाता है। साथ ही झांकी भी निकाली जाती है। यहां शिवलिंग बहुत पुराना है। यहां एक बाबा रहते थे। वो कहां चले गए, यह नहीं पता।
- चंद्र मोहन, प्रधान मंदिर कमेटी, धीन।
यह मंदिर क्षेत्र में बहुत प्राचीन है। तब यहां केवल शिवलिंग होता था। जिसके बाद हरीश मोदगिल ने मंदिर का वर्ष 1980 में निर्माण करवाया। यहां पर लोगों की अटूट आस्था है।
- कर्म सिंह सैनी, वरिष्ठ उपप्रधान मंदिर कमेटी, धीन।