अंबाला सिटी के सेक्टर सात स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में चल रहे सामूहिक रामायण पाठ में कथा सु
- फोटो : Ambala
अंबाला सिटी। सेक्टर सात स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में चल रहे सामूहिक श्री 108 रामायण पाठ में मंगलवार को पंडित धमेंद्र गौड़ व पंडित त्रिलोचन शर्मा की ओर से विधिपूर्वक कथा व्यास का पूजन करवाया गया। संगीतमय गणेश वंदना प्रारंभ करते हुए श्री रामायण पाठ का शुभारंभ कर पंडित भगवती प्रसाद ने कहा कि भगवान से प्रेम करने वाले भरत श्रीराम की तलाश में वनों में गए। उनके साथ प्रजा के लोग, उनकी माताएं और शत्रुघ्न आदि निकल पड़े। वह यह सोचकर अयोध्या से निकले थे कि किसी भी तरह से श्रीराम को वापस लेकर पहुंचेंगे।
वह वनों में प्रस्थान करते हुए सबसे पहले प्रयागराज पहुंचे। जहां प्रयागराज वासियों ने भगवान श्रीराम के बारे में उन्हें विस्तारपूर्वक जानकारी दी। भगवान श्रीराम की तलाश में भरत अपने परिवारजन और प्रजा के साथ चित्रकूट की ओर चल पड़े। पंडित भगवती प्रसाद ने बताया कि चित्रकूट का भी बहुत बड़ा रहस्य है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पश्चिमी दिशा को राम घाट के नाम से जाना जाता है। यह स्थान अपने आप में इतना अलौकिक है कि दर्शनार्थियों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। राम घाट चित्रकूट के सबसे पवित्र स्थानों में एक है।
इसके बारे में पौराणिक कथा है। जिसमें लिखा गया है कि भगवान श्रीराम इसी स्थान पर स्नान किया करते थे। इसलिए यह घाट श्रद्धालुओं के लिए पवित्र माना जाता है। श्रीराम के चित्रकूट आगमन की जानकारी मिलने पर महर्षि गौतम की पुत्री गोदावरी नासिक से गुप्त रूप से भूमिगत मार्ग से होकर प्रकट हुई थी। जिस कारण इस गुफा को गुप्त गोदावरी का नाम मिला था। इसी प्रसंग के साथ मंगलवार की कथा को विराम दिया गया। कथा के समापन पर मंदिर में पहुंचे सभी भक्तों ने आरती में भाग लिया व प्रसाद ग्रहण किया।
सिटी के सेक्टर सात स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में चल रहे सामूहिक रामायण पाठ में भाग लेते भक्त- फोटो : Ambala