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वीटा मिल्क प्लांट में कार्यरत ड्राइवर के बैंक खाते से निकाले 3.52 लाख

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अंबाला सिटी। आपके खाते से 50 हजार रुपये निकल गए हैं। आपके अकाउंट पर ई-सर्विस एक्टिव है। वीटा मिल्क प्लांट में बतौर चालक कार्यरत बहादुर के पास जब यह फोन आया तो उनके होश उड़ गए। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक कर्मी बताया। सुनते ही बहादुर ने कहा कि जब मैंने कोई सर्विस एक्टिव ही नहीं करवाई तो रुपये कैसे निकल सकते हैं। बहादुर के अनुसार वह चंडीगढ़ जा रहा था। बीच रास्ते में जीरकपुर रुककर जब उसने एचडीएफसी के बूथ से एटीएम के जरिए मिनी स्टेटमेंट निकलवाई तो उसके खाते में पड़े पहले 50 और फिर 1 लाख रुपये निकल चुके थे। इसके बाद उसने कस्टमर केयर से बातचीत कर अपने खाते को बंद करवा दिए, लेकिन इसके बाद भी खाते से रुपये निकलते रहे और खाते में पड़े 3 लाख 52 हजार रुपये निकलवा लिए गए।
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रविवार को अंबाला शहर में माडल टाउन के पास एसबीआई की शाखा में काम होता है। बहादुर वहां पहुंचा और मैनेजर को सारी बात बताई। मैनेजर ने अकाउंट चेक किया तो पता चला कि 2 लाख 23 हजार रुपये की एफडी किसी ने रुपये ट्रांसफर करवाने के बाद अपने नाम करवा ली है। इस पर बैंक मैनेजर ने यह सारे रुपये चेक के माध्यम से वापस बहादुर के खाते में ट्रांसफर करवा दिए। कुल 1 लाख 29 हजार रुपये की उसके साथ ठगी हुई। अब इस मामले में साइबर सेल थाने की जांच के बाद सेक्टर-9 थाने में अज्ञात पर केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी गई। आरोपियों की तलाश जारी है। मुंडा माजरा बकनौर और वर्तमान में नसीरपुर में किराएदार बहादुर सिंह ने शिकायत में लिखा कि उनका सिटी के अग्रसेन चौक पर स्थित पॉलीटेक्निक कॉलेज चौक पर स्थित एसबीआई में खाता है। 13 मार्च की सुबह करीब 12 बजे आए फोन पर एक व्यक्ति ने स्वयं को बैंक कर्मी बताया। कहा कि उनके खाते में ई-सर्विस चालू है। उन्होंने खाते से 50 हजार निकाल लिए हैं। उस समय बहादुर सिंह ने अपने एटीएम से खाते की जानकारी ली तो पता चला कि अज्ञात ने खाते से 50 हजार और 1 लाख रुपये नेट बैंकिंग द्वारा निकाले हैं। शाम होते-होते बैंक में पड़े सारे रुपये निकल चुके थे।
बहादुर ने बताया कि उसके छोटे भाई ने एक्सिस बैंक से तीन लाख रुपये की लिमिट करवाई थी। उसने अपने भाई से यह रुपये बेटी की पढ़ाई के लिए अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए थे। जिन्हें आरोपी ने निकाल लिया। इसके बाद साइबर सेल को भी शिकायत दी गई। जांच में पता चला कि 50 हजार रुपये चंडीगढ़ सेंट्रल ट्रेजरी में गए थे। वहां से 50 हजार रुपये भी वापस आ गए लेकिन 79 हजार रुपये अभी भी शातिर ठगों के पास ही हैं।
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