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मिसाल: इन महिलाओं ने आपदा को अवसर में बदला, जानिए कैसे बनीं आत्मनिर्भर

Sun, 13 Jun 2021 04:16 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

कोरोना कर्फ्यू में काम ठप होने पर मास्क बनाया, सब्जी बेचकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनीं। बसहई गांव की प्रतिमा प्रेरणा समूह की महिलाएं दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा।
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प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़ूी महिलाएं सब्जी उगाकर अपनी आमदनी बढ़ाती हैं। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कोरोना महामारी और कोरोना कर्फ्यू में आपदा को गोरखपुर जिले के बसहई गांव की महिलाओं ने अवसर में बदल दिया। स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने काम बंद होने पर मास्क निर्माण, बिक्री और सब्जी उत्पादन कर विपरीत हालात में भी आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की।
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बसहई गांव के प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं कोरोना प्रकोप से पहले हैंडबैग, ट्राउजर आदि बनाती थीं। कुछ महिलाएं ब्यूटी पॉर्लर का संचालन करती थीं। महामारी का प्रकोप बढ़ा तो कोरोना कर्फ्यू लग गया। 

समूह की सदस्यों का काम बंद हो गया। इससे आय भी ठप हो गई। समूह की अध्यक्ष ने कोरोना कर्फ्यू में पैदा हुए हालात से निपटने के लिए सभी पदाधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम संगठन की बैठक कराई। 
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बैठक में एक सखी ने प्रस्ताव रखा कि जिन महिलाओं के पास खेत है, वह कोरोना कर्फ्यू के दौरान सब्जी की खेती के लिए समूह की महिलाओं के साथ साझा करें। जो महिलाएं हैंडबैग, ट्राउजर सिलने और ब्यूटी पॉर्लर का काम कर रही थीं, वे मास्क बनाएं। 
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सभी ने सहमति दी तो बेलघाट के ब्लॉक मिशन प्रबंधक, रजत सिंह ने महिलाओं को इस काम के लिए तकनीकी सहायता, कच्चा माल और बिक्री के लिए उचित प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया। 

सामूहिक रूप से की गई सब्जी की खेती से जो भी मुनाफा होता, समूह की महिलाओं के बीच बांट दिया जाता। इसी तरह मास्क की बिक्री से होने वाली आय ने महिला सदस्यों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया। 

बेलघाट ब्लॉक के बीएमएम रजत सिंह कहते हैं कि कोरोना कर्फ्यू में बैठक प्रतिबंधित होने के कारण इस दौरान बहुत से कार्य नहीं कराए जा सके। अब समूह में अधिक महिलाओं को जोड़कर उन्हें आर्थिक उन्नति देने के लिए मल्टीग्रेन आटा, फाइल प्रिंटिंग केंद्र, सिलाई सेंटर, अचार-पापड़ बनाने के कार्य सहित अन्य योजनाएं तैयार की जा रही हैं। जल्द ही इसका लाभ सभी समूहों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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