आरएमआरसी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि जांच में डेंगू के अलावा स्क्रब टाइफस के भी केस मिल रहे हैं। अभी वायरस का असर कुछ दिन और बना रहेगा। इसलिए लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। पिछले साल इसकी जांच कराई गई थी। इस साल जिन नमूनों का परीक्षण किया गया है, उसमें अभी कुछ नया बदलाव नहीं दिखा है।
मल्टी विटामिन और तरल पदार्थ अधिक लें
चिकित्सक डॉ. ओंकार राय ने कहा कि इस वक्त जो बुखार हो रहा है, उनका लक्षण के आधार पर उपचार किया जा रहा है। प्लेटलेट्स कम होने या थकान महासूस होने पर घर में रहकर इलाज की बजाय, अस्पताल में भर्ती होना अधिक सुरक्षित है। मच्छरों से बचाव जरूरी है। मरीज को मल्टीविटामिन और तरल पदार्थ अधिक देना है।
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- मरीज के ऊर्जा स्तर को बढ़ाए रखने के लिए अधिक से अधिक तरल पदार्थ दें।
- ओआरएस और नारियल पानी भी बेहतर विकल्प है।
- डिहाइड्रेशन न होने पाए, इसके लिए नमक, चीनी और पानी का घोलकर बनाकर पिलाते रहें।
- मरीज को अधिक से अधिक आराम करने दें।
- जिसे बुखार हुआ है, उसे अनिवार्य रूप से मच्छरदानी में ही सुलाएं, जिससे कि मच्छरों के जरिए बुखार दूसरों में न फैले।
- एंटीबायोटिक दवाएं तभी खाएं, जब जांच के बाद डॉक्टर इसके लिए सलाह दें।
- तीन दिन से अधिक दिन बुखार रहने पर डेंगू की जांच अवश्य कराएं।
- बुखार होने पर सिर समेत पूरे शरीर को ठंडे पानी से पोछें, ताकि तापमान नियंत्रित रहे।