खूंखार बाघ शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में शुक्रवार की शाम पीलीभीत से आया। वहां पर इसने कई गांवों में आतंक मचाया था। वन विभाग की टीम ने 23 सितंबर को इसे पकड़ा था। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के निर्देश के बाद इसे चिड़ियाघर भेजा गया। चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि नर बाघ को क्वारंटीन सेल में रखा गया है।
पीलीभीत से रेस्क्यू कर लाए गए नर बाघ को चिड़ियाघर के क्वारंटीन सेल में रखा गया है। यहां उसकी पहली रात बेचैनी में गुजरी। उसे अलग-अलग प्रकार के मांस दिए गए, लेकिन उसने बहुत कम मात्रा में खाया, हालांकि भरपूर मात्रा में पानी पीया। अभी उसे तनाव कम करने की दवा दी जा रही है। एक सप्ताह तक उसके व्यवहार पर नजर रखी जाएगी।
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खूंखार बाघ शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में शुक्रवार की शाम पीलीभीत से आया। वहां पर इसने कई गांवों में आतंक मचाया था। वन विभाग की टीम ने 23 सितंबर को इसे पकड़ा था। पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ के निर्देश के बाद इसे चिड़ियाघर भेजा गया। चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि नर बाघ को क्वारंटीन सेल में रखा गया है।
इसको खाने के लिए अलग-अलग तरह का मीट दिया जा रहा है। पहली रात में इसने कम मात्रा में मांस खाया। जल्द ही इसके स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। इसके बाद उच्चाधिकारियाें का जो निर्देश होगा उसके अनुसार इस पर निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि चिड़ियाघर के रेस्क्यू सेंटर में पहले से ही दो बाघ मौजूद हैं।
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तनाव कम करने के लिए दी जा रहीं दवाएं
डॉ. योगेश ने बताया कि जंगल के स्वछंद वातावरण में रहने वाले बाघ को जब पिंजरे में रखा जाता है तो उसके व्यवहार में परिवर्तन आता है। जंगल के माहौल से चिड़ियाघर के माहौल में ढलने में वक्त लगता है। इसका असर उनके आहार-व्यवहार पर दिखता है। इस बाघ के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। इसने पहले दिन मांसाहार कम किया, लेकिन पानी भरपूर पीया। इसे तनाव को कम करने के लिए दवाइयां दी जा रही हैं। धीरे-धीरे व्यवहार शांत होने लगेगा।