डॉ. गगन गुप्ता ने बताया कि शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखकर हीटस्ट्रोक से बचा जा सकता है। शरीर में पानी की कमी न होनें दें। प्यास लगने का मतलब है कि आपके शरीर में पानी की कमी है, इसलिए कोशिश करें कि इस मौसम में शरीर को इस स्थिति में न पहुंचने दें। दिन के समय में धूप से दूर रहने की कोशिश करें। बताया कि हीट-स्ट्रोक के कारण वैसे तो सामान्य स्थितियों में बुखार, सिरदर्द और उल्टी जैसी दिक्कतें होती हैं, लेकिन जिस तरह से मौसम में बदलाव हो रहा है कि स्थितियां जानलेवा हो सकती हैं।
अभी इमरजेंसी में आ रहे इक्का-दुक्का मरीज
हीटस्ट्रोक की चपेट में आने वाले इक्का-दुक्का मरीज ही अभी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के इमरजेंसी प्रभारी डॉ. शहनवाज ने बताया कि हीटस्ट्रोक की स्थिति में इमरजेंसी इलाज की आवश्यकता होती है। समय पर इलाज न होने से मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे और मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। गंभीर स्थितियों में इलाज न मिलने पर मौत हो जाती है।
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हीटस्ट्रोक के लक्षण
पसीना कम आना, शरीर बहुत गर्म हो जाना, बेचैनी, हांफना, बहुत ज्यादा गर्मी लगना, बेहोशी छाना, क्रैम्प आना, दौरा पड़ना।
बचाव के उपाय
बहुत जरूरी होने पर पर्याप्त इंतजाम के साथ ही धूप में घर से निकलें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं। धूप में छाता और टोपी पहने या फिर गमछा बांधकर चलें। सूती के सुविधाजनक ढीले कपड़े ही पहने। कम से कम 15 सन प्रोटेक्शन फैक्टर (एसपीएफ) का सनस्क्रीन लगाएं। पानी के अलावा नींबू पानी, ताजा जूस और नारियल पानी पीएं।