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Gorakhpur Air Pollution: सुखद होगा सिक्सलेन का दीदार मगर पहले बीमार बना रहा धूल का गुबार

Thu, 23 Nov 2023 08:38 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह बताते हैं कि इधर दिवाली के बाद ओपीडी में करीब 30 फीसदी मरीज बढ़े हैं। बच्चों में सर्दी-खांसी के मामले गंभीर हैं। कई ऐसे बीमार बच्चे आए हैं, जिनके घरवालों को एलर्जी की वजह से खांसी-सर्दी है और उनके संक्रमण से बच्चा भी बीमार हो गया।
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ट्रांसपोर्ट नगर चौक से रूस्तमपुर रोड पर उड़ रही धूल । - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शहरवासी नौसड़-पैडलेगंज सिक्सलेन को लेकर उत्साहित हैं। निश्चित तौर पर सिक्सलेन का दीदार लोगों के लिए बेहद सुखद होगा, मगर उसके पहले की चुनौतियों से खुद को बचाना भी जरूरी है। दरअसल, इस प्रोजेक्ट की परिधि में आने वाले इलाकों के लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं। निर्माण कार्य से उठ रहा धूल का गुबार लोगों को बीमार बना रहा है। अत्यधिक धूल-धक्कड़ के चलते लोग खांसी और एलर्जी के मरीज बन रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में इस तरह के मरीज 30 फीसदी बढ़ गए हैं।

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ऐसे में डॉक्टर, लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि धूल और धुआं के प्रदूषण के चलते एलर्जी के केस बढे़ हैं। मरीजों को मास्क पहनकर घर से निकलने की सलाह दी जा रही है। स्वस्थ रहेंगे, तभी बाद में इस अच्छी सड़क का बेहतर आनंद ले सकेंगे।

सबसे ज्यादा दिक्कत में ट्रांसपोर्टनगर से रुस्तमपुर के बीच रहने वाले लोग हैं। सिक्सलेन और उसपर बन रही ओवरब्रिज के निर्माण कार्य के चलते उड़ रही धूल की वजह से उनका बाहर निकलना दूभर हो गया है। सबसे अधिक मुश्किल में वे लोग हैं, जिनके घर या दुकानें इस सड़क के किनारे हैं। निर्माण स्थल पर धूल रोकने के लिए प्रयास नाकाफी हैं, इसलिए लोगों को खुद ही इससे बचाव का इंतजाम करना होगा।
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बेतियाहाता में चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. नदीम अर्शद ने बताया कि लगातार धूल व वाहनों के प्रदूषण के चलते संक्रमण बढ़ रहा है। लोगों को उपचार से अधिक सावधानी रखने की जरूरत है। धूल से बचने का उपाय करना होगा। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी मिश्रा बताते हैं कि ओपीडी में हर दिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनके घरों के आसपास निर्माण कार्य चल रहा है। इन लोगों को धूल व धुएं की वजह से दिक्कत हो रही है।

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हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. आसिफ शकील बताते हैं कि प्रदूषण हृदय रोगियों के लिए सबसे अधिक घातक है। प्रदूषण के चलते एलर्जी, सर्दी-खांसी के मामले बढ़ते हैं। मरीज के फेफड़े में भी संक्रमण होता है। इन सबका प्रत्यक्ष असर हृदय की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। हृदय रोगियों के लिए प्रदूषण प्रत्यक्ष तौर पर खतरनाक होता है। पहले से बीमार मरीजों पर इसका असर और अधिक होता है। इसलिए हृदय रोगियों को सलाह दी जा रही है कि वे खुद को प्रदूषण से बचाने का उपाय करें। इसके अलावा सुबह-शाम अगर टहलने जा रहे हैं तो हाथ-मुंह को अच्छी प्रकार से ढक लें, जिससे कि सीधे प्रदूषण की चपेट में आने से बच सकें।

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बच्चों में भी बढ़ रहा संक्रमण

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके सिंह बताते हैं कि इधर दिवाली के बाद ओपीडी में करीब 30 फीसदी मरीज बढ़े हैं। बच्चों में सर्दी-खांसी के मामले गंभीर हैं। कई ऐसे बीमार बच्चे आए हैं, जिनके घरवालों को एलर्जी की वजह से खांसी-सर्दी है और उनके संक्रमण से बच्चा भी बीमार हो गया। बच्चों को बड़ों की अपेक्षा अधिक सुरक्षा की जरूरत होती है। इसलिए मरीजों के परिजनों को सुझाव दिया जाता है कि खुद को बीमार होने से बचाएं।

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ये करें उपाय
  • अगर टहलने जा रहे हैं तो सड़क की बजाय ऐसे पार्क या मैदान में जाएं, जिसकी बाउंड्री के किनारे ऊंचे व घने पेड़ हों। पेड़ों की पत्तियां धूल व अन्य प्रदूषण को सोख लेती हैं, जिससे पार्क के अंदर की हवा सड़क की अपेक्षा काफी शुद्ध हो जाती है।
  • घर से बाहर निकलें तो एन-95 मास्क पहनें। इसमें धूल व धुएं के प्रदूषण को रोकने की क्षमता अच्छी होती है।
  • अगर धूल भरे रास्ते से वापस लौटे हैं तो हाथ-मुंह को अच्छी तरह धो लें और गुनगुने पानी से गरारा करें।
  • अस्थमा के मरीज धूल की तरफ जाने से बचें और अपनी दवा व इन्हेलर का नियमित उपयोग करते रहें।


 
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