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तैयारी: गोरखपुर में कालाजार से बचाव के लिए होगा दूसरे चक्र का छिड़काव, यहां मिले थे सबसे अधिक मरीज

Tue, 10 Aug 2021 06:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

जिला मलेरिया अधिकारी की मौजूदगी में लोगों का हुआ प्रशिक्षण, पिपरौली ब्लॉक में वर्ष 2019 में मिला था कालाजार का प्रवासी मरीज।
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पिपरौली स्वास्थ्य केंद्र पर कालाजार से बचाव के छिड़काव का प्रशिक्षण देते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले के पिपरौली ब्लॉक स्थित भौवापार गांव के करीब 2000 घरों में रहने वाली 10000 की आबादी को कालाजार की बीमारी से सुरक्षित किया जाएगा। इस काम में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और स्वयंसेवी संगठन पाथ भी तकनीकी सहयोग देंगे। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ अंगद सिंह की मौजूदगी में छिड़कावकर्मियों को पिपरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर मंगलवार को प्रशिक्षित किया गया है।

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उन्होंने बताया कि 35 दिनों तक गांव में अभियान के तौर पर कालाजार की जनक बलुई मक्खी निरोधक दवा का छिड़काव किया जाएगा। यह अभियान 20 अगस्त से प्रस्तावित है। वर्ष 2019 में इस गांव में कालाजार का प्रवासी मरीज सामने आया था, इसलिए एहतियातन यहां लगातार तीन वर्षों तक दवा का छिड़काव होगा।

इस बीच जिला मलेरिया अधिकारी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के अलावा सीएचसी के लैब और मिनी पीकू का निरीक्षण भी किया। प्रशिक्षण में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ निरंकेश्वर राय, डब्ल्यूएचओ कोआर्डिनेटर डॉ सागर और पाथ के प्रोग्राम मैनेजर डॉ. ज्ञान ने बताया कि शारीरिक दूरी का पालन करते हुए मॉस्क एवं ग्लब्स लगा कर छिड़काव कार्य संपन्न करेंगे।
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बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती हैं। ऐसे में सभी प्रशिक्षुओं को बताया गया है कि दवा का छिड़काव घर के अंदर तथा बाहर छह फीट तक कराना है। छिड़काव के बाद तीन माह तक छिड़काव स्थल पर पुताई नहीं होनी चाहिए।

 

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वर्ष 2016 में भी मिला था मामला

इस मौके पर सहायक मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे, चंद्र प्रकाश मिश्रा, मलेरिया विभाग से राहुल सिंह,  प्रभात रंजन सिंह, बेसिक हेल्थ वर्कर हेमंत कुमार, सुजीत कुमार, सावित्री सिंह, आशा कार्यकर्ता मोना देवी, शांति देवी, सुमन देवी और उषा पांडेय ने प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया।

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि कालाजार का एक मामला वर्ष 2016 में सरदारनगर क्षेत्र में आया था। वह मरीज भी बिहार के सिवान जिले से यहां आया था। प्रोटोकॉल के मुताबिक संबंधित आबादी को वर्ष 2017, 2018 और 2019 में दवा का छिड़काव करवा कर प्रतिरक्षित किया गया। कालाजार का प्रकोप मुख्य रूप से कुशीनगर और देवरिया जनपद में पाया जाता है, जो बिहार से सटे जिले हैं।

 
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