ऐसे चल रहा है पूरा खेल
इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने वालों का पूरा एक समूह है। यहां पहला विक्रेता जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी है, लेकिन उसने माल की खरीद-बिक्री कागज में ही की और टैक्स भी नहीं चुकाया। उसने जिसे कागज में माल बेंचा, उसने इनपुट क्रेडिट का लाभ ले लिया, जबकि पहले ने टैक्स जमा ही नहीं किया।
इसके बाद खरीद-बिक्री का यह पेपर तीसरे कारोबारी को पकड़ा दिया, जिसने बिना किसी वैध कागजात के ही माल खरीदा और इस पेपर के सहारे अपना कारोबार कर रहा है। इस खेल में एक साथ कई व्यापारी शामिल होते हैं। एक माल अलग-अलग दुकानदारों को बेंचा जाता है। बिक्री का इन्वायस कटता है और बिल बैंक में जमा होता है। बाद में जमा की गई जीएसटी पर रिटर्न दाखिल कर लिए गए रुपये ले लिए जाते हैं।
टैक्स इनपुट क्रेडिट का लाभ पाने वालों की जांच के दौरान तीन ऐसी कंपनियों के बारे में जानकारी मिली है, जिनका सेंट्रल जीएसटी में पंजीकरण है और इन्होंने माल की खरीद-बिक्री भी की है। परंतु, वास्तव में ये कंपनियां वजूद में ही नहीं हैं। इन कंपनियों ने कोई टैक्स जमा ही नहीं किया, जबकि इनके खरीदारों ने इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले लिया। - राजेश सिंह, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2, व्यापार कर।