गोरखपुर जिले में डेंगू के मरीज मिलने के बाद इसकी जांच कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका फायदा उठाकर निजी पैथ लैब 185 रुपये के रैपिड किट की जांच का 1200 से 1600 रुपये वसूल रहे हैं। जबकि जिला अस्पताल में यह जांच निशुल्क उपलब्ध है। निजी लैबों की इस मनमानी पर स्वास्थ्य विभाग अंकुश भी नहीं लगा पा रहा है।
जानकारी के मुताबिक जिले में ढाई सौ से अधिक पैथोलॉजी हैं। सभी में डेंगू की जांच भी रैपिड किट से होती है। इस जांच में निजी पैथालॉजी को जबरदस्त मुनाफा होता है। किट से जांच में महज 15 से 20 मिनट का समय लगता है। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर पैथालॉजी रिपोर्ट देते हैं। जबकि स्वास्थ्य महकमा इस जांच को मानता भी नहीं है। बिना एलाइजा जांच के रिपोर्ट अधूरी मानी जाती है।
बताया जा रहा है कि जिस किट से निजी लैब में जांच की जाती है उसकी कीमत 125 से 180 रुपये तक होती है। चार कंपनियों की किट बाजार में मौजूद भी है। इसके अलावा चाइनीज किट एनएस-वन एंटीजन भी बाजार में हैं। इसकी कीमत 225 रुपये तक है। इससे एंटीबॉडी जांच भी हो जाती है। एलाइजा जांच की सुविधा शहर के सिर्फ पांच निजी पैथालॉजी में ही है। इनका भी रेट 1500 रुपये और आरटीपीसीआर जांच की दर 3000 रुपये है। डेंगू की जांच एलाइजा और आरटीपीसीआर दोनों से होती है। लेकिन इस जांच में छह से सात घंटे लगते हैं। यही कारण है कि लोग इस जांच को नहीं कराते हैं।
लखनऊ में तय कर दिए गए हैं रेट
प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डेंगू जांच के रेट तय कर दिए गए हैं। यहां पर रैपिड जांच का एक हजार और एलाइजा जांच का 1200 रुपये तय किया गया है। जबकि जिले में डेंगू के नाम पर निजी पैथालॉजी जबरदस्त लूट कर रहे हैं।
सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि निजी पैथोलॉजी संचालक डेंगू की जांच के नाम पर मनमाना रेट नहीं वसूल सकते हैं। इसे लेकर पैथोलॉजी एसोसिएशन के पदाधिकारियों से वार्ता कर रेट तय करने को कहा जाएगा। इसके अलावा जिला अस्पताल में एलाइजा जांच की सुविधा निशुल्क है। लोग जिला अस्पताल में जांच करा सकते हैं।