गोरखपुर जिले के सहजनवां ब्लॉक का एक राइस मिलर करीब छह करोड़ रुपये का सरकारी धान लेकर लापता है। बताया जा रहा है कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा खरीदे गए धान को मिलर को कूट कर चावल अलग करने के लिए दिया गया था। अब मिल में ताला लगा हुआ है और सरकारी धान भी गायब है। हालांकि अधिकारी अभी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक किसानों से खरीदे गए धान को कूट कर चावल बनाने के लिए विभिन्न मिलिंग कंपनियों का चयन किया जाता है। चयन के बाद इन कंपनियों को कूटने के लिए धान आवंटित किया जाता है। सरकारी एजेंसियां इसके लिए बाकायदा मिल की स्थिति, मिलिंग क्षमता, मिलर की आर्थिक स्थिति आदि का सत्यापन करती हैं।
सत्यापन के बाद ही मिलर को धान आवंटित किया जाता है। मिलर को कितना धान दिया गया, उसमें से निकलने वाले चावल, भूसी की अनुमानित मात्रा भी दर्ज की जाती है। मिलर निर्धारित समय सीमा में धान कूट कर चावल भारतीय खाद्य निगम को सौंपता है।
इलाके में चर्चा है कि पीसीएफ की ओर से सहजनवां ब्लॉक क्षेत्र स्थित एक मिलर को करीब छह करोड़ रुपये कीमत का धान कूटने के लिए दिया गया था। निर्धारित समय बीतने के बाद भी मिलर ने पीसीएफ को चावल का एक दाना भी नहीं दिया।