जीएसटी काउंसिल ने एक जनवरी से रेडीमेड गारमेंट्स पर पांच प्रतिशत जीएसटी बढ़ाने का निर्णय लिया है। काउंसिल के निर्णय से रिटेल दुकानदारों को कारोबार चौपट होने का डर सता रहा है। कोरोना लॉकडाउन के कारण मंदी झेल रहे रिटेल कारोबारी कर की दर बढ़ने से ऑनलाइन के मुकाबले रिटेल कारोबार अधिक महंगा हो जाने की वजह से ग्राहक टूटने की आशंका से ग्रस्त हैं। दुकानों में पहले से डंप पड़े माल पर एक जनवरी के बाद सात प्रतिशत अतिरिक्त जीएसटी चुकाने की चिंता भी इन कारोबारियों को सता रही है।
कोरोना महामारी के दौरान त्योहारी सीजन और सहालग में लॉकडाउन लगने से रेडीमेड और कपड़ा कारोबार बीते दो वर्ष से मंदी की मार झेल रहा था। कोरोना की दूसरी लहर के सुस्त पड़ने के बाद बाजार में रौनक लौटनी शुरू हुई है। दिवाली और त्योहारी सीजन के मद्देनजर रेडीमेड कारोबारियों ने नया कलेक्शन भी इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। ऐसे में जीएसटी रेडिमेड गारमेंट में पांच प्रतिशत का स्लैब खत्म करते हुए बारह प्रतिशत के ही स्लैब में मर्ज करने से छोटे कारोबारी व्यापार मंदा पड़ने के डर से चिंतित नजर आ रहे हैं।
टूट जाएगा रिटेल बाजार
रेडीमेड कारोबारी मणीनाथ गुप्ता ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के कारण दो सीजन में रेडीमेड कपड़ों का कारोबार ठप रहा, इससे रेडीमेड कारोबारी पहले ही बुरी तरह टूटा हुआ है। एक हजार रुपये से कम कीमत वाले रेडीमेड कपड़ों पर पांच प्रतिशत का स्लैब समाप्त कर उसे भी 12 प्रतिशत के स्लैब में शामिल किया जाना रिटेल क्षेत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को यह फैसला तब तक टालना चाहिए था जब तक बाजार की मुश्किलें समाप्त नहीं होतीं।
ऑनलाइन के मुकाबले टिकना होगा मुश्किल
रेडीमेड गारमेंट कारोबारी संजय सिंघानिया ने बताया कि जीएसटी सात प्रतिशत बढ़ाने का नुकसान रिटेल कारोबारियों को होगा। उत्पादक से रिटेल कारोबारी तक माल ट्रेडर, स्टॉकिस्ट, होल सेलर से होते हुए पहुंचता है। यानी करीब चार चरणों में जीएसटी चुकाने के कारण कीमत बढ़ जाएगी। इसके विपरीत ऑनलाइन ट्रेडर सीधे उत्पादक से खरीद कर एक बार ही जीएसटी चुकाएगा। इस कारण उसकी लागत कम होगी। रिटेल बाजार को नुकसान होगा।
कारोबारियों पर पड़ेगी दोहरी मार
थोक वस्त्र व्यवसायी एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश नेभानी ने बताया कि रेडीमेड गारमेंट हो या कपड़े, जिले में दुकानदारों के पास अरबों रुपये का माल स्टॉक है। इस माल पर दुकानदार पांच प्रतिशत जीएसटी चुका चुके हैं। एक जनवरी के बाद बचे हुए स्टॉक पर दुकानदारों को सात प्रतिशत अतिरिक्त जीएसटी चुकाना होगा। इसकी भरपाई कब होगी यह तो दुकानदार को नहीं मालूम लेकिन टैक्स चुकाना उसकी मजबूरी होगी। काउंसिल को यह फैसला रिटेल सेक्टर के हित में टालना चाहिए।
बढ़ेगी महंगाई
रेडीमेड गारमेंट कारोबारी वैभव अग्रवाल ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन के कारण उपजी मंदी से रेडीमेड गारमेंट कारोबार अभी उबरना शुरू कर रहा है। जीएसटी दर बढ़ाए जाने से ग्राहक और दुकानदार दोनों पर असर पड़ेगा। रेडीमेड गारमेंट में छोटे कारोबारियों के यहां अधिकतर मध्यम वर्ग के लोग खरीदारी करने आते हैं। जीएसटी बढ़ने से कपड़ों के दाम बढ़ेंगे जिससे ग्राहक कम खरीदारी करेंगे जिससे दुकानदार की आय घटेगी जबकि दुकान संचालन का खर्च बढ़ेगा।