गोरखपुर जिले में कॉल स्पूफिंग हो या फिर आईडी हैक कर जालसाजी करने की वारदात, पुलिस अधिकारियों के नाम पर जालसाजी करने वाले जालसाजों को अब तक पुलिस नहीं पकड़ पाई है। जालसाजों ने एडीजी रहे दावा शेरपा के सोशल मीडिया अकाउंट को हैक कर रुपये मांगे। इतना ही नहीं उन्होंने एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु के अकाउंट को पहले हैक किया। इसके बाद उनके स्पूफिंग के जरिए उनका मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर महिला को परेशान किया। इन सभी मामलों में अफसरों के आदेश पर केस तो दर्ज हैं, लेकिन साइबर जालसाज अब तक पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े।
जालसाज कितने बेखौफ हो चुके हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे पुलिस अफसरों को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रहे हैं। पहले आम लोगों को ही जालसाज निशाना बनाते थे और रिश्तेदार या दोस्त से रुपये की मांग करते थे, लेकिन अब वर्दी वाले दारोगा से लेकर एडीजी तक निशाने पर हैं।
आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो एक साल में साइबर जालसाजी के मामले 456 जिले में सामने आ चुके हैं। इनमें एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु की आईडी को हैक कर रुपये मांगने का मामला, इसके पहले एसएसपी और सीओ के नंबरों का इस्तेमाल कर महिला को फोन करके परेशान करने जैसे मामले में भी शामिल हैं। इनकी जांच साइबर सेल कर रही है, मगर इनमें एक कदम की भी प्रगति नहीं है। एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु का कहना है कि सभी मामलों में जांच जारी है। कुछ सुराग भी मिले हैं, पुलिस टीम जल्द ही आरोपी को पकड़ लेगी।
इस तरह से करते हैं जालसाजी
जालसाज सोशल मीडिया पर मौजूद फोटो का इस्तेमाल कर नई आईडी बनाते हैं, फिर आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते हैं। दोस्ती स्वीकार होने के थोड़ी देर बाद ही हालचाल लेने के साथ ही ऑनलाइन भुगतान एप के बारे में पूछकर आवश्यक काम बताते हैं। इसके बाद जालसाज मदद मांगते हैं और अक्सर लोग इसमें फंसकर रुपये गंवा देते हैं।
यह होती है स्पूफिंग
सॉफ्टवेयर के जरिए साइबर जालसाज किसी को किसी नंबर से कॉल करता है, लेकिन जिसे कॉल किया गया है, उसके नंबर पर कॉल करने वाले का नंबर नहीं डिस्प्ले होता। स्क्रीन पर वह नंबर डिस्प्ले होता है, साइबर क्रिमिनल जो नंबर चाहता है। इस तकनीकी का इस्तेमाल करके साइबर जालसाज जिसे शिकार बनाना है, उसके किसी परिचित का नंबर इस्तेमाल करता है। बेचारा शिकार बनाया गया व्यक्ति परिचित के नंबर के झांसे में आकर वह सब कुछ कर देता है, जैसा कॉलर कहता है। उदाहरण के तौर पर एक सज्जन को उनके करीबी दोस्त के नंबर से कॉल आई। कॉलर ने कहा कि इन सज्जन का रास्ते में एक्सीडेंट हो गया है। यह मोबाइल उनके पास ही मिला है, इससे कई बार आपके नंबर पर कॉल किया गया है। लिहाजा, मैंने भी आपका नंबर डायल कर दिया है। इन साहब की हालत ठीक नहीं है, इनको अस्पताल में भर्ती करना है, तत्काल 20 हजार रुपये की जरूरत है। पे फोन से तुरंत भेजें। कॉलर ने पैसे भेजने के संबंध में निर्देश बताएं। करीबी दोस्त का मामला था, लिहाजा, उन्होंने तत्काल ही रुपये भेज दिए। रुपये भेजने के बाद उन्होंने उस नंबर पर डायल किया तो फोन उनके उन साथी ने उठाया, जिनका एक्सीडेंट बताकर उनसे 20 हजार रुपये ठगे जा चुके थे। मामला पुलिस की साइबर शाखा तक पहुंचा तो उन्हें पता चला कि यह सब स्पूफिंग के जरिए किया गया।