बीआरडी मेडिकल कॉलेज की लापरवाही से मरीज की मौत के 12 दिन बाद कर्मचारियों को शव की याद आई। कर्मचारियों ने वार्ड से शव के गायब होने की सूचना पुलिस को दी। पुलिस दो दिन तक शव के लिए परेशान रही। इस बीच पता चला कि परिजन 12 दिन पहले ही शव का अंतिम संस्कार कर चुके थे।
जानकारी के मुताबिक महराजगंज के पुरन्दरपुर की रहने वाली सलोना देवी दो नवंबर को घर में गिरकर चोटिल हो गई थी। परिजन इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। जहां इलाज के दौरान छह नवंबर की दोपहर में उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन शव को लेकर घर चले गए। वहां अंतिम संस्कार कर दिया।
इस मामले में बुधवार को कॉलेज की लापरवाही सामने आई। मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर से 17 नवंबर की शाम 4 बजकर 36 मिनट पर एक मेमो गुलरिहा थाने में दाखिल किया गया। इस मेमो में (पुलिस सूचना) मरीज की मौत के बाद शव के लापता होने की सूचना लिखी थी। वार्ड के रजिस्टर में बिना बताए शव लेकर भागना (एब्सकांड) दर्ज था। मामले में दो दिन तक पुलिस परेशान रही।
बुधवार की शाम को मेडिकल कॉलेज पुलिस चौकी पर जीडी में दाखिल मेमो पहुंचा। मेमो के मिलने के बाद पुलिस टीम ने शव की तलाश शुरू कर दी। सबसे पहले मर्चरी के रिकार्ड को खंगाला गया। मर्चरी के रिकार्ड में इस नाम का कोई शव छह नवंबर से आज तक रखा नहीं मिला। इसके बाद टीम ने ट्रामा सेंटर के आईसीयू में पहुंचकर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स से 11 दिन बाद मेमो भेजने की बात पूछी। कोई जवाब नहीं मिला तो पुलिस ने थाना प्रभारी पुरन्दरपुर से संपर्क किया। वहां से दो सिपाही परिजनों के घर पहुंचे। जहां पता चला कि परिजनों ने छह नवंबर को ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी।