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जयंती विशेष: परमहंस योगानंद ने पूरे विश्व में किया क्रिया योग का प्रचार-प्रसार, गोरखपुर में हुआ था जन्म

Wed, 05 Jan 2022 05:04 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर शहर के कोतवाली क्षेत्र में परमहंस योगानंद का जन्म हुआ था। परमहंस योगानंद ने अपने अनुयायियों को क्रिया योग का उपदेश दिया था।
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परमहंस योगानंद - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर शहर के कोतवाली क्षेत्र में जन्मे परमहंस योगानंद (मुकुंद लाल घोष) ने अपने अनुयायियों को क्रिया योग का उपदेश दिया और पूरे विश्व में उसका प्रचार-प्रसार किया। योगानंद के अनुसार, क्रिया योग ईश्वर से साक्षात्कार की एक प्रभावी विधि है, जिससे अपने जीवन को संवारा और ईश्वर की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है।

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परमहंस योगानंद का जन्म शहर के नखास चौक कोतवाली के बगल में स्थित एक मकान में पांच जनवरी 1893 को हुआ था। यहीं पर उनके पिता भगवती चरण घोष सपरिवार किराए पर रहते थे। मुकुंद लाल आठ भाई-बहनों में चौथे नंबर पर थे। उनके पिता ने ही उस समय सरकारी कार्यों में आपूर्ति व ठेके के संबंध में कुछ बंगालियों के साथ मिल घोष कंपनी बनवाई थी और उसी नाम से आज भी गोरखपुर में घोष कंपनी चौराहा मशहूर है।

परमहंस योगानंद के जीवन के प्रथम आठ वर्ष यहीं पर व्यतीत हुए थे। इनके पिता जी रेलवे के प्रथम जनरल मैनेजर होने के साथ ही पीडब्लूडी व कई विभागों के मुखिया भी थे। भूमा शांति मिशन के अध्यक्ष अरुण ब्रह्मचारी ने बताया कि 1914 में आश्रम व्यवस्था के अनुसार सन्यास ग्रहण करने पर इनका नाम मुकुंद लाल घोष से स्वामी योगानंद हो गया और 1935 में इनके गुरु परमहंस युक्तेश्वर गिरी ने इन्हें परमहंस की अग्रेता धार्मिक उपाधि प्रदान की थी।
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अमेरिका में किया ‘सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप’ का गठन

समाजसेवी मंजीत श्रीवास्तव ने बताया कि क्रिया योग को ईश्वर से साक्षात्कार का प्रभावी तरीका मानने वाले योगानंद ने भारतीय योग दर्शन के प्रसार के लिए अमेरिका में ‘सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप’ का गठन किया और बाद में हिंदुस्तान में योगदा सत्संग सोसाइटी बनाई। ऑटोबायोग्राफी ऑफ योगी (हिंदी में योगी कथामृत) उनकी सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताब है, जिसका अनुवाद कई भाषाओं में हुआ।

1920 में सर्वधर्म सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए योगानंद अमेरिका चले गए और वहां से पूरी दुनिया में क्रिया योग का प्रचार-प्रसार किया। सात मार्च 1952 को अमेरिका में ही भारतीय राजदूत विनय रंजन सेन के सम्मान में आयोजित भोज में भारत देश का गुणगान करते हुए उनका देहावसान हो गया।

क्या है क्रिया योग

संस्कृत के शब्द क्रिया का मतलब करना है। इसलिए क्रिया योग का मतलब है कि वे प्रणालियां जिनके द्वारा सेहत, आध्यात्मिक विकास, या एकता-चेतना का अनुभव हो। पतंजलि के 2000 साल पुराने योग सूत्र में लिखा है कि क्रिया योग का मतलब है मन और इंद्रियों को वश में रखना, स्वयं विश्लेषण, स्वाध्याय, ध्यान का अभ्यास और अहंकार की भावना का ईश्वर प्राप्ति के लिए त्याग।
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