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गोरखपुर विश्वविद्यालय: 13 विभागाध्यक्षों को जारी कारण बताओ नोटिस होगा वापस, इस वजह से लिया गया फैसला

Wed, 05 Jan 2022 01:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्षों से की मुलाकात, बोले- अनुशासनहीनता के लिए विश्वविद्यालय में कोई जगह नहीं। कोई भी साथियों को भड़काए नहीं, सकारात्मक सोच से होगा विकास।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 13 विभागाध्यक्षों को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस वापस लिया जाएगा। इसी सिलसिले में कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने मंगलवार को अलग-अलग संकायाध्यक्ष व विभागाध्यक्षों से मुलाकात की। बीते सोमवार को 167 शिक्षकों ने आमसभा करके कारण बताओ नोटिस पर नाराजगी जाहिर की थी। इसलिए कुलपति की पहल को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

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जानकारी के मुताबिक, विभागाध्यक्षों ने कुलपति प्रो. राजेश सिंह से च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) में अच्छा काम होने की बात कही और प्रशंसा पत्र जारी करने की मांग रखी। इस पर कुलपति ने सहमति जतायी है। कुलपति ने कहा कि सकारात्मक सोच के साथ विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाना चाहते हैं। कहा कि पिछले एक साल में पठन-पाठन और शोध के क्षेत्र में बेहतर काम हुआ है। नियमों के तहत सभी समस्याओं को दूर कराया जाएगा है। अनुशासनहीनता के लिए विश्वविद्यालय में जगह नहीं है, इसलिए कोई भी अपने साथियों को भड़काए नहीं।

सकारात्मक सोच से विश्वविद्यालय का विकास होगा। वह अमेरिका की 11 दिन की यात्रा के बाद लौटे हैं। अमेरिका की जॉन होपकिंग यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड कॉलेज पार्क, यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का भी गए थे। उन्होंने बताया कि इन ख्यातिलब्ध संस्थानों से विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए समझौता किया जाएगा।  
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ई-मेल या मैसेज भेजकर कर सकते हैं मुलाकात

कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी मुलाकात के लिए ई-मेल आईडी या व्हाट्सएप नंबर पर संदेश भेज सकते हैं। उन्होंने संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों और शिक्षकों से पूरी जानकारी साझा की है। हर महीने विभागाध्यक्षों के साथ बैठक का भरोसा दिलाया है। कुलपति ने 15 जनवरी के बाद हर सप्ताह तीन से चार विभागों के निरीक्षण की बात भी कही है।

26 जनवरी से पहले प्रमोशन, पीएचडी इंक्रीमेंट पर निर्णय

एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की बैठक में प्रमोशन, आवास आवंटन, पीएचडी इंक्रीमेंट, मेडिक्लेम इंश्योरेंस सरीखे मुद्दों पर चर्चा हुई। कुलपति ने कहा कि 26 जनवरी से पहले इन समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। एसोसिएट प्रोफेसर के प्रमोशन और पीएचडी इंक्रीमेंट के मुद्दे पर तीन संकायाध्यक्ष, कुलसचिव, वित्त अधिकारी की समिति बनाई जाएगी। समिति दो सप्ताह में रिपोर्ट कुलपति को देगी। एसोसिएट प्रोफेसर के प्रमोशन के लिए एकेडमिक परफारमेंस इंडेक्स (एपीआई) की गणना कराकर, एक्सपर्ट पैनल लेने की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। अप्रैल 2018 में नियुक्ति हासिल करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रमोशन फार्म भरवाने की प्रक्रिया भी जल्द प्रारंभ होगी। आवास आवंटन की प्रक्रिया 26 जनवरी तक पूरी होगी।

बुलावे पर भी नहीं आए प्रो कमलेश गुप्त

कुलपति प्रो राजेश सिंह ने पहल करते हुए हिंदी विभाग के निलंबित प्रो कमलेश कुमार गुप्त, हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो दीपक त्यागी, पूर्व अध्यक्ष प्रो अनिल राय को आमंत्रित किया था। विभागाध्यक्ष प्रो दीपक त्यागी ने फोन से प्रो कमलेश कुमार गुप्त को सूचना भी दी थी, मगर वे नहीं आए। बता दें कि प्रो गुप्ता अपनी बात को विश्वविद्यालय के अधिकारियों के समक्ष रखने की बजाय सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। उन्हें 24 नोटिस के बाद निलंबित किया गया है। बताया जाता है कि प्रो गुप्त ने कभी किसी प्रकार की समस्या के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारियों से समय नहीं मांगा है।  

जितने पाठ्यक्रम की पढ़ाई, उतने से पूछे जाएंगे सवाल

विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्री पीएचडी वर्ष 2019-20 के अभ्यर्थियों से उतने ही सवाल पूछे जाएंगे, जितना कोर्स पढ़ाया गया है। रिसर्च मैथडलॉजी और कंप्यूटर एप्लीकेशन के सिलेबस की पढ़ाई कराई गई है। इस पर बुधवार को कुलसचिव कार्यालय से नोटिफिकेशन भी जारी होगा।
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