16-17 अप्रैल को प्राचीन विद्या के इस महासमागम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होंगे। आयोजन में आयुर्वेद, ज्योतिष, योग जैसी महाविद्याओं के जनहित में इस्तेमाल पर चर्चा होगी।
गुरु गोरखनाथ की धरती पर प्राचीन विद्याओं के महाज्ञानियों के साथ 16 और 17 अप्रैल को अमर उजाला-गैलेंट एनसिएंट साइंस कॉन्क्लेव (प्राच्यविद्या महासमागम)-2022 का अभिनव आयोजन होगा। इसमें आयुर्वेद और ज्योतिष जैसी प्राचीन विद्याओं के जाने-माने ज्ञानी आरपीएम एकेडमी ग्रीन सिटी में जुटेंगे। इन विद्याओं का जनहित में अधिकाधिक कैसे इस्तेमाल हो, इस पर महासमागम में वृहद चिंतन होगा। निशुल्क परामर्श भी दिया जाएगा। महासमागम के मुख्य अतिथि गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होंगे।
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एनसिएंट साइंस कॉन्क्लेव- (प्राच्यविद्या महासमागम) का शुभारंभ 16 अप्रैल से आरपीएम एकेडमी ग्रीनसिटी में होगा। इस दिन उद्घाटन की औपचारिकता के साथ ही जनसामान्य के लिए निशुल्क परामर्श का कार्यक्रम होगा। इसमें कोई भी व्यक्ति पहले आओ-पहलो पाओ के आधार पर निशुल्क परामर्श प्राप्त कर सकता है। शाम को महाज्ञानी आपस में संवाद करेंगे।
अगले दिन यानी 17 अप्रैल को सुबह 11 बजे गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी कार्यक्रम मेें शिरकत करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी को दूसरी बार उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालने के लिए सम्मानित भी किया जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ प्राच्य विद्या के ज्ञानीजनों को संबोधित करेंगे। प्राच्य विद्या से जुड़े अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफार्म माई ज्योतिष डॉट कॉम की लांचिंग होगी। इसके बाद सीएम योगी महासमागम में आने वाले ज्ञानियों को सम्मानित भी करेंगे। दोपहर दो बजे से अलग-अलग सत्रों में आयुर्वेद, ज्योतिष विद्या के जानकार जनहित में प्राचीन विद्या के इस्तेमाल पर मंथन करेंगे।
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गैलेंट इस्पात लिमिटेड के निदेशक मयंक अग्रवाल ने कार्यक्रम को खास बताया और सफलता की कामना की है। आरपीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स के प्रबंध निदेशक अजय शाही, होटल रेडिसन ब्लू के प्रबंध निदेशक अरुण चन्द और महाप्रबंधक अभिषेक सिंह का अमर उजाला की अभिनव मुहिम को सफल बनाने में विशेष सहयोग रहेगा।
17 अप्रैल को विभिन्न विषयों पर भविष्य का अनुमान लगाने वाले विद्वान निशुल्क परामर्श देंगे। देश के जाने-माने विद्वान कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। ज्योतिष, आयुर्वेद और योग के महाज्ञानी निशुल्क परामर्श देंगे। इसके लिए पहले आओ पहले परामर्श पाओ की व्यवस्था की गई है। हर विद्वान अलग-अलग निशुल्क परामर्श देंगे, ऐसी व्यवस्था की गई है।
आयुर्वेद
आयुर्वेद शास्त्र का विकास उत्तर वैदिक काल में हुआ। इस विषय पर अनेक स्वतंत्र ग्रंथों की रचना हुई। भारतीय परंपरा के अनुसार आयुर्वेद की रचना सबसे पहले ब्रह्मा ने की। ब्रह्मा ने प्रजापति को, प्रजापति ने अश्विनी कुमारों को और फिर अश्विनी कुमारों ने इस विद्या को इंद्र को प्रदान किया। इंद्र के द्वारा ही यह विद्या संपूर्ण लोक में विस्तारित हुई। इसे चार उपवेदों में से एक माना गया है। आयुर्वेद की मुख्य तीन परंपराएं हैं- भारद्वाज, धनवन्तरि और कश्यप। इन्हीं के रचित ग्रंथों पर आयुर्वेद आधारित है।
ज्योतिष
ज्योतिष वैदिक साहित्य का एक अंग है। इसमें सूर्य, चंद्र, पृथ्वी, नक्षत्र, ऋतु, मास आदि की स्थितियों पर गंभीर अध्ययन किया गया है। इस विषय का ‘वेदांग ज्योतिष’ नामक ग्रंथ है। इसकी रचना का समय 1200 ई. पू. माना गया है। आर्य भट्ट और वराहमिहिर ने ज्योतिष को विज्ञान के प्रकाश के तौर पर बेहद व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया था। आर्य भट्ट ज्योतिष गणित के सबसे बड़े विद्वान माने जाते हैं। पांचवीं सदी के गणितज्ञ, खगोलशास्त्री, ज्योतिषी और भौतिक विज्ञानी थे।
महाआयोजन में ज्योतिष और आयुर्वेद के कौन-कौन से महारथी पधार रहे हैं, जानने के लिए पढ़ते रहिए अमर उजाला।