कोराना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों के अलावा निजी अस्पतालों में भी मोबाइल वैन भेजकर जांच कराने का फैसला लिया है। इस दौरान किसी व्यक्ति के पॉजिटिव मिलने पर उसका इलाज कोविड अस्पताल में होगा। साथ ही जरूरत के मुताबिक जीनोम सीक्वेसिंग के लिए नमूना लिया जाएगा।
सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि बीमार लोगों में संक्रमण की संभावना ज्यादा है। इसकी वजह से निजी अस्पतालों में मोबाइल वैन भेजकर मरीजों की कोरोना जांच कराई जाएगी। पॉजिटिव मिलने पर कोविड अस्पताल भेजकर उनका इलाज होगा। सीएमओ ने वैन पहुंचने पर जांच में सहयोग की अपील की। बताया कि एयरपोर्ट पर सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा रही है। राहत की बात यह है कि अब तक विदेश से यहां आने वाला एक भी व्यक्ति कोविड पॉजिटिव नहीं मिला है।
कोविड इलाज के लिए तैयार हैं अस्पताल
सीएमओ ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर टीबी अस्पताल, होम्योपैथिक कॉलेज बड़हलगंज सहित 50-50 बेड के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को कोविड के इलाज के लिए तैयार कर लिया गया है। इन जगहों पर अभी सामान्य ओपीडी भी चल रही है। मरीज बढ़ने पर आगे का फैसला किया जाएगा। 17 अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगा दिए गए हैं। सभी प्लांट चल रहे हैं। ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं होने पाएगी।
शासन से लैब तकनीशियन की मांग
कोविड की पहली और दूसरी लहर में मरीजों की संख्या बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने आउटसोर्सिंग के जरिए 30 लैब तकनीशियन तैनात किए थे। संक्रमण कम होने पर इनको बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अब एक बार फिर जांच का दायरा बढ़ाना है तो लैब तकनीशियनों की कमी की समस्या सामने आ रही है। इसके लिए विभाग ने फिर से शासन को पत्र लिखकर लैब तकनीशियन की मांग की है।