नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपते सहारावासी।
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सहारा इस्टेट गोरखपुर शहर की एक पॉश कॉलोनी है, फिर भी सहारावासी साफ-सफाई, बिजली-पानी जैसी आधारभूत सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। उनका मानना है कि यदि कॉलोनी को नगर निगम के अधिकार क्षेत्र के तहत ले लिया जाए तो इन समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। इसी सिलसिले में गुरुवार को सहारा इस्टेट आवासीय कल्याणकारी समिति के अध्यक्ष डॉ. एपी त्रिपाठी, सचिव मंजीत कुमार सिंह, सदस्य एसवी सिंह, शंभूनाथ राय, निगरानी समिति के संजोग सिंह व मीडिया प्रभारी त्रिभुवन ने नगर आयुक्त को ज्ञापन भी दिया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सहारावासी हाउस टैक्स, वाटर टैक्स व सीवर कर देने के लिए तैयार हैं। परिसर में एक हजार से ज्यादा मकान हैं। छह हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। नगर निगम में शामिल होने के बाद समस्याएं कम होंगी। साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर होगी। खराब सड़कें बन जाएंगी।
अध्यक्ष डॉ. एपी त्रिपाठी व सचिव मंजीत कुमार सिंह कहते हैं कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। कई बार जनप्रतिनिधियों से मदद मांगी गई, लेकिन किसी कंपनी द्वारा विकसित कॉलोनी का तर्क देकर मदद से इनकार कर दिया जाता है। कहा जाता है कि सरकारी धनराशि से कोई काम नहीं करा सकते हैं। इतनी बड़ी व व्यवस्थित कॉलोनी सरकारी उपेक्षा की शिकार है।
समिति के सदस्य एसवी सिंह, शंभूनाथ राय, मीडिया प्रभारी त्रिभुवन सिंह व निगरानी समिति के सदस्य संजोग सिंह कहते हैं कि सहारा कंपनी ने जो सपने दिखाकर घर बेचा था, वह खोखला साबित हुआ है। घर बेचने के बाद कंपनी अपनी जिम्मेदारियों से मुकर गई। वन टाइम मेंटेनेंस (ओटीएम) के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले हैं, फिर भी परिसर के रखरखाव या फिर सुविधाओं को बढ़ाने में कोई रुचि नहीं है। अब जरूरत सरकारी हस्तक्षेप की है।
गोरखपुर नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि सहारा इस्टेट को नगर निगम के दायरे में लाने के लिए ज्ञापन मिला है। सोसायटी के पदाधिकारियों को सकारात्मक फैसला लेने का भरोसा दिलाया गया है। यह शहर की प्रमुख कॉलोनी है। लिहाजा, जनसरोकार पहली प्राथमिकता पर रखे जाएंगे।