कुलपति प्रो. जेपी पांडेय व उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल रवींद्र प्रताप शाही ने अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) एवं उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मिलकर आपदा से होने वाली तबाही को रोकने एवं लोगों को जागरूक करने का काम करेंगे। इसके लिए दोनों ही संस्थाओं के बीच अनुबंध किया गया। एमएमएमयूटी की तरफ से कुलपति प्रो. जेपी पांडेय, जबकि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की तरफ से उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल रवींद्र प्रताप शाही ने हस्ताक्षर किए।
यह समझौता पांच साल यानी वर्ष 2026 तक प्रभावी रहेगा और दोनों पक्षों की सहमति से इसे बढ़ाया जा सकेगा। इस समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान मिलकर भूकंपरोधी निर्माण, बाढ़ प्रबंधन, अन्य प्राकृतिक आपदाओं के निवारण की दिशा में काम करेंगे।
इस समझौते की अहमियत इस बात से और बढ़ जाती है कि यह प्रधानमंत्री के डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट के दस सूत्रीय कार्यक्रम को साकार करने में सहायक होगा। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल रवींद्र प्रताप शाही ने कहा कि यह समझौता राज्य के लोगों को तबाही और उसके दुष्प्रभावों से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान करेगा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा प्राकृतिक आपदाओं के बारे में आमजन में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर बहुत ज्यादा नुकसान हो जाता है। इस नुकसान को जागरूकता बढ़ा कर और तकनीक के इस्तेमाल से कम किया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि आपदा प्रबंधन एक उभरता हुआ क्षेत्र है और इसे ध्यान में रखते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय ने आपदा प्रबंधन में पाठ्यक्रम तैयार किया है, जो इस वर्ष से आरंभ होगा।
उन्होंने एमएमएमयूटी सहित नवस्थापित गुरु श्री गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय एवं अन्य संस्थानों का आह्वान किया कि वे मिलकर प्राकृतिक आपदाओं को रोक सकने की दिशा में कार्य करें।
कुलसचिव प्रो. बृजेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिजित मिश्र ने किया। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को स्मृतिचिह्न भेंट कर सम्मानित किया।