गोरखपुर मंडल के तीन अभियंताओं के निलंबन के दूसरे दिन सोमवार को अभियंता संघ के पदाधिकारियों ने मुख्य अभियंता कार्यालय पहुंचकर कार्यालय का घेराव कर विरोध दर्ज कराया। अभियंताओं ने कहा कि निलंबन का आदेश सिर्फ वाहवाही लूटने की नीयत से किया गया है। अभियंताओं ने सवाल उठाया कि क्या रुपये के लेनदेन का कोई भी वीडियो प्रमाण सामने है? नहीं है तो किस आधार पर कार्रवाई की गई।
उन्होंने कहा कि कनेक्शन देने की पूरी कार्रवाई अभियंताओं की तरफ से की गई। इसमें किसी की ओर से अनियमितता नहीं बरती गई। क्या कनेक्शन दिए जाने को लेकर बैंक या अन्य किसी की तरफ से कभी शिकायत आई थी?
आदेश में साफ है कि लाइन शाम को काट दी गई थी। लेकिन लाइन काटने या रुपये मांगे जाने की शिकायत किसी के द्वारा किसी अभियंता से की गई थी? अगर की गई थी और उसके बाद विलंब हुआ तो इसमें उनके पर्यवेक्षणीय पद की लापरवाही प्रतीत होती और प्रबंधन की कार्रवाई का सभी अभियंता सहयोग करते।
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उन्होंने कहा कि संविदाकर्मियों को काम से हटाने या किसी प्रकार की कार्रवाई करने का अधिकार एसई, एक्सईन, एसडीओ और जेई के पास नहीं है। ऐसे में उनकी गलती की सजा अभियंताओं को दे दी गई।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी शंभू प्रसाद ने कहा कि बिजली कनेक्शन को लेकर अक्सर शिकायतें सुनने में आती रहती हैंं। आए दिन कनेक्शन दिए जाने के नाम पर आरोप लगते रहे हैं। इस बार कनेक्शन जोड़ने पर रुपये मांगे जाने की बात सामने आई है। संज्ञान लेकर प्रथमदृष्टया सभी पर सख्त कार्रवाई देकर एक संदेश भी दिया गया है। बिजली निगम उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सुविधा देने के लिए है। ऐसे मामले सामने आने से की बिजली निगम की छवि धूमिल होती है।