रेलवे अफसरों के दफ्तरों में उनके रूम के बाहर रेड और ग्रीन सिग्नल लगा रहता है। इस सिग्नल का सीधा सा मतलब है कि रेड सिग्नल जला है तो किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं है।
यानी अंदर कॉन्फिडेंशियल काम चल रहा है। जबकि ग्रीन सिग्नल जलने पर साहब से मिला जा सकता है। यह सिग्नल अफसर अंदर लगे स्विच से जलाते हैं।
इसे अंग्रेजों ने शुरु कराया था। रेलवे को वे सिग्नल के आधार पर चलाते थे। यही नहीं बड़े अफसरों और उनके अधीनस्थ में इंटर सिग्नल होता है।
अफसर अगर बाहर जाते हैं तो उनके कमरे की लाइट बुझ जाती है और उनके अधीनस्थ अधिकारी के रूम में लगी लाइट जल जाती है। इससे कोई उन्हें पूछे पता चल जाए की साहब कमरे में नहीं हैं।