कोरोना संक्रमितों ने ठीक होने के लिए बिना डॉक्टरों की सलाह के बेहिसाब हाई ग्रेड एंटीबायोटिक दवाएं खाई हैं। अब इसका दुष्परिणाम सामने आ रहा है। पोस्ट कोविड ओपीडी में प्रतिदिन 15 से 20 मरीज ऐसे आ रहे हैं जिन्होंने हाई ग्रेड एंटीबायोटिक दवाएं खाई थी और अब उन्हें परेशानी हो रही है।
दरअसल, हाई ग्रेड एंटीबायोटिक दवाओं के अधिक इस्तेमाल से मनुष्य के शरीर के अंदर खराब बैक्टीरिया के साथ माइक्रो बायोम्स (मित्र बैक्टीरिया) भी मर जाते हैं। इस वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने के साथ डायरिया और हार्मोन संतुलन की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इन शिकायतों को लेकर जिला अस्पताल से लेकर बीआरडी और निजी अस्पतालों में मरीज पहुंच रहे हैं।
बिना सलाह के न खाएं एंटीबॉयोटिक दवाएं
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ राजेश कुमार कहते हैं कि कारोना संक्रमितों ने हाई ग्रेड एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल खूब किया है। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज तो बिना डॉक्टर की सलाह के ही हाई ग्रेड एंटीबायोटिक खाते रहे। जबकि एंटीबायोटिक दवाएं चिकित्सकों की सलाह पर ही खानी चाहिए। ऐसे मामले ओपीडी में आने लगे हैं। उन्हें यही सलाह दी जा रही है कि जितने दिन चिकित्सक एंटीबॉयोटिक लिखें उतने दिन ही दवाओं का सेवन करें।
एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से मित्र बैक्टीरिया भी हो जाते हैं नष्ट
स्पदंन हॉस्पिटल के डॉ उपेंद्र सिंह ने बताया कि इस तरह के मरीज ओपीडी में लगातार आ रहे हैं। उन्हें सलाह दी जा रही है कि वायरल इंफेक्शन में मेंबिना सलाह के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें। मित्र बैक्टीरिया विशेषकर हमारी आंतों में पाए जाते हैं, जो पाचक एंजाइम के रिसाव और पोषक तत्वों में सहायक होते हैं। एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल से यह बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। इस वजह से मरीजों को डायरिया सहित अन्य बीमारियां होती हैं। इसलिए बिना चिकित्सकों की सलाह के एंटीबायोटिक का इस्तेमाल न करें।