चार साल पहले घर से कमाने गए गोरखपुर जिले के बेलीपार के विस्टौली खुर्द निवासी विश्वनाथ (45) के परिवार के साथ जो हुआ, वह कभी किसी ने सोचा भी नहीं होगा। मुंबई से कमाकर लौट रहे विश्वनाथ की कानपुर रेलवे स्टेशन के पास तबीयत खराब हो गई और कुछ देर बाद चल बसे। पुलिस ने पहचान कर घरवालों को सूचना देने की जगह लावारिस में दाह संस्कार करा दिया।
इधर, घरवाले फरियाद लिए बेलीपार थाने का चक्कर काटते रह गए। मुख्यमंत्री तक बात पहुंची तो बेलीपार पुलिस सक्रिय हुई। इसके बाद पता चला कि 17 जून को ही उनकी मौत हो चुकी है और दाह संस्कार भी हो गया। विश्वनाथ रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई गए थे। सोफा बनाने का काम करते थे।
घर पर पत्नी चंदा व दो बेटे 18 वर्षीय अमन साहनी व 15 वर्षीय विकास अपने दादा कंता निषाद के साथ रहते हैं। चार साल बाद 15 मई को विश्वनाथ ने पत्नी से घर आने के लिए ट्रेन पकड़ने की बात कही थी। रास्ते में कानपुर के पास सुल्तानपुर के रहने वाले अरविंद नामक युवक ने 17 मई को फोन कर पत्नी चंदा से बताया था कि विश्वनाथ की तबीयत खराब है। इन्हें कानपुर जीआरपी के पास उतार दे रहे हैं, आकर ले जाना।