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महिला दिवस पर विशेष: गोरखपुर विश्वविद्यालय की रोल मॉडल हैं इफ्फत, खोजा है दुनिया का सबसे चमकीला पदार्थ

Mon, 08 Mar 2021 11:15 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

  • रोल मॉडल हैं गोरखपुर विश्वविद्यालय की शोधार्थी रहीं घासीकटरा की इफ्फत अमीन
  • फेलोशिप से की पढ़ाई, फिलहाल इंदौर में कर रहीं नौकरी
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इफ्फत अमीन। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाली इफ्फत अमीन महिलाओं की रोल मॉडल हैं। फेलोशिप से पढ़ाई करने वाली इफ्फत ने विभिन्न केमिकल पदार्थों की मदद से रेडियम की प्रापर्टी शो करने वाला दुनिया का सबसे चमकीला पदार्थ बनाया है। यह अंधेरे में चमकीले प्रकाश  का विकल्प हो सकता है। इस संबंध में कई शोध भी अब शुरू हो गए हैं।

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घासीकटरा निवासी अमीनुल्लाह अंसारी की बेटी इफ्फत अमीन ने विवि से बीएससी व एमएससी की पढ़ाई की। फिर उन्होंने पीएचडी भी यहीं से किया। इफ्फत के पिता ठेकेदार हैं और उनकी मां यास्मीन शिक्षिका हैं। दो भाई व दो बहनों में वह सबसे छोटी हैं।

इफ्फत को पिछले दीक्षांत समारोह में अति विशिष्ट शोध के लिए गुरु गोरक्षनाथ गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया था। इफ्फत वर्तमान में इंदौर पॉलिटेक्निक में नौकरी कर रही हैं। साथ ही शोधकार्य भी जारी है। चमकीले पदार्थों पर शोध करने वाली इफ्फत के मेंटर प्रोफेसर उमेश नाथ त्रिपाठी प्रसन्न दिखे। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि चमकीले पदार्थ से संबंधित शोध पत्र दुनिया के सात अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। यह बड़ी उपलब्धि है।
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दो साल लग गए दुर्लभ तत्व जुटाने में

इस पदार्थ पर आईआईटी चेन्नई व जापान के क्यूशू इंस्टीट्यूट में परीक्षण हुआ था। इन इंस्टीट्यूट से जुड़े विशेषज्ञों ने ही इसे विश्व का सबसे चमकीला पदार्थ बताया है। पदार्थ के चमक क्षमता की बात की जाए तो 91.9 प्रतिशत है, जबकि अब तक जितने भी ऐसे चमकीले पदार्थ बने हैं उनकी क्षमता 80 फीसदी है।  

इफ्फत अमीन ने दुर्लभ तत्व लैंथेनाइड सीरियम जैसे कई मिश्रण से कुल 48 कांप्लेक्स बनाए। इफ्फत को शुरुआत के दो साल सिर्फ दुर्लभ तत्व इकट्ठा करने व संश्लेषण के बाद उसके प्रयोगों को समझने में ही लग गए। इन तत्वों को इकट्ठा करने के बाद, उनकी अलग-अलग ल्युमिनिसेंस चमक की क्षमता जांच की गई।

आमजनों को होगा फायदा  
इस पदार्थ की मदद से एक से दो वाट के करंट से तेज रोशनी देने वाली ऑर्गेनिक एलईडी बल्ब का निर्माण हो सकेगा। एमआरआई के भी परिणाम अच्छे होंगे। रडार कम ऊर्जा में काम करेगा।
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