केस नंबर एक-
पैना गांव निवासी योगेंद्र सिंह और राधेश्याम तिवारी के परिवार के बीच मामूली विवाद था। 28 जुलाई 1998 को नागपंचमी के त्योहार के दिन खेत में भैंस चली जाने पर हुए विवाद में योगेंद्र सिंह के परिजन गोलबंद होकर राधेश्याम तिवारी के दरवाजे पर चढ़ गए।
इसके बाद कई राउंड फायरिंग की गई जिसमें राधेश्याम तिवारी और उनके पुत्रों ब्रह्मशंकर, धर्मेंद्र व उमेश की मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने 14 लोगों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
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केस नंबर दो-
चकरा नोनार गांव में जमीन के विवाद में हंसनाथ यादव और लल्लन यादव के परिवार के बीच 20 वर्ष से अदावत चली आ रही थी। लल्लन यादव का 25 नवंबर 2021 को ब्रह्मभोज था। इसके लिए 23 नवंबर को भाई लालधारी और उनके पुत्र कोकिल, रमेश, बेचू जमीन की साफ-सफाई कर रहे थे। इसी बीच हंसनाथ के परिवार से कहासुनी होने लगी।
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बात बढ़ी तो दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। इसी बीच गोली चलने से रमेश यादव, कोकिल, राजाराम, देवानंद, अंकित, विनोद, लालधारी और बेचू घायल हो गए थे। जिनमें सगे भाई रमेश और कोकिल को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। हत्याकांड में मामले में पुलिस ने महिला सहित 14 पर केस दर्ज किया था। यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है।