गोरखपुर में फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने 17 लोगों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। ये वे नाम है जो सामने तो आए थे लेकिन इसकी जांच पूरी नहीं हो सकी थी। अब एसआईटी एक-एक नाम की भूमिका की जांच कर रही है। खबर है कि इस मामले में जेल जा चुके एक सपा नेता से जुड़े कुछ लोग भी इसमें शामिल है, जिसकी जांच चल रही है।
जानकारी के मुताबिक, 14 अगस्त 2019 को फर्जी लाइसेंस पर असलहा जमा करने वाले गोरखनाथ इलाके तनवीर को पकड़े जाने के बाद पूरा मामला खुलकर सामने आया था। तब संदेह यही था कि कुछ लोगों ने ही ऐसा किया होगा और फिर तत्कालीन असलहा बाबू राम सिंह की तहरीर पर पुलिस ने रवि आर्म्स कार्पोरेशन के प्रोपराइटर, कैंट निवासी शिवम मिश्रा, राप्तीनगर के विकास तिवारी और तनवीर के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था। विस्तृत जांच के लिए जब पुलिस प्रशासन की तरफ से एसआईटी गठित की गई तो परत दर परत मामला खुलकर सामने आने लगा।
कई बड़े लोगों के नाम उजागर हुए और जेल भी भेजे गए, लेकिन इसी बीच एसआईटी प्रभारी रहे आईपीएस बोत्रे रोहन प्रमोद के तबादले के बाद से ही मामले की जांच पूरी तरह से ठप हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने 15 लोगों पर चार्जशीट दाखिल कर दिया था और फिर विवेचना एक दरोगा कर रहे थे।
एसएसपी के तौर पर जिले में आए दिनेश कुमार प्रभु को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अब इसकी गहराई के लिए एसआईटी गठित कर दी थी। अब एसपी क्राइम की अगुवाई में जांच कर रही टीम को 17 नाम मिले है जिसकी पड़ताल की जा रही है। एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने बताया कि सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण की विवेचना एसआईटी कर रही है। जो भी तथ्य सामने आ रहे है उसकी गहनता से जांच जारी है। जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।