साहब! ढाई साल से इंतजार करके थक चुका हूं। मेरी बंदूक प्रशासन अपने पास ही रख ले। अब तो उसमें जंग भी लग गई होगी। कैसी दिखती थी, यह भी भूल गया हूं। यह पीड़ा थी महोबा के रहने वाले शस्त्र लाइसेंसधारी प्रभात की जो बड़ी आस लेकर मंगलवार को अपना शस्त्र लेने टाउनहाल स्थित रवि गन हाउस के सामने पहुंचे थे। प्रभात महज एक बानगी हैं, उनकी जैसी ही पीड़ा उन करीब 200 शस्त्र लाइसेंसधारियों की है जिनके शस्त्र रवि गन हाउस में बंद पड़े हैं।
लाइसेंसधारियों के अनुरोध पर डीएम विजय किरन आनंद ने मंगलवार को एसीएम के नेतृत्व में टीम को दुकान खुलवाकर लाइसेंसधारियों को शस्त्र दिलाने का निर्देश दिया था। टीम और लाइसेंसधारी पहुंच गए लेकिन दुकान संचालक नहीं पहुंचा। मौके से एसीएम ने जब संचालक को फोन किया तो उसने आने से साफ इनकार कर दिया। मजबूरन टीम को वापस लौटना पड़ा। संचालक का कहना था कि प्रशासन ने इस संबंध में पूर्व में कोई नोटिस नहीं दिया। ऐसे में बिना नोटिस के वह दुकान पर कैसे आ सकते हैं। उनका कहना है कि नोटिस मिलेगी तो निश्चित तौर पर दुकान पर पहुंचेंगे और प्रशासन का पूरा सहयोग भी करेंगे। वहीं प्रशासन का कहना है कि उन्होंने पूर्व में ही प्रोपराइटर को सूचना देकर मंगलवार के दिन आने के लिए कहा था।
डीएम विजय किरन आनंद ने बताया कि दुकान खोलकर लोगों के रखे असलहे निकालने के लिए टीम को भेजा गया था। दुकान के प्रोपराइटर के न आने के कारण टीम को लौटना पड़ा। प्रोपराइटर को चेतावनी दी गई है कि एक सप्ताह के अंदर दुकान पर मौजूद होकर ताला खुलवाने में मदद करें वर्ना उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बहानेबाजी नहीं चलेगी।