गोरखपुर में जिले में इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन खत्म हो गई है। अब बच्चे और किशोर बिना वैक्सीन लगवाए ही लौट रहे हैं। इससे दिक्कत बढ़ गई है। यही स्थिति रही तो इंसेफेलाइटिस के मामले और बढ़ सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक पूर्वांचल में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के मामले फिर बढ़ गए हैं। जनवरी से अब तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ही 120 से ज्यादा मरीजों का इलाज हो चुका है। अब तक गोरखपुर मंडल के 10 मासूमों की मौत हुई है। इसके बाद भी जेई का टीका स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार के मरीज तेजी से बढ़े हैं। इंसेफेलाइटिस मरीजों में भी बुखार होता है फिर दूसरे लक्षण दिखते हैं। जिले में हर माह 10 हजार से ज्यादा बच्चों को टीका लगता है, जो फिलहाल ठप है। टीकाकरण कब शुरू होगा, यह भी स्वास्थ्य महकमे के अफसर नहीं बता पा रहे हैं। यह वैक्सीन 14 वर्ष तक के किशोरों को लगाई जाती है।
इमरजेंसी मरीजों के लिए रखी है 20 वैक्सीन
स्वास्थ्य विभाग के पास 20 वैक्सीन ही बची हुई है। जो इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए रखे हैं। अगर जल्द ही टीके नहीं आए तो दिक्कत और बढ़ सकती है। इमरजेंसी इस्तेमाल के टीके भी नहीं बचेंगे।
नियमित टीकाकरण में जेई वैक्सीन हैं शामिल
जापानी इंसेफेलाइटिस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए शासन ने जेई टीकाकरण को नियमित टीकाकरण में शामिल किया है। अप्रैल 2013 से हर बच्चे को दो चरणों में टीका लगाया जा रहा है। पहला टीका नौ माह से 12 माह और दूसरा टीका 16 माह से 16 साल की उम्र में लगता है। यह टीका बच्चे की जीवन भर जेई से सुरक्षा करता है। टीकाकरण शुरू होने के बाद से मरीजों को काफी राहत मिली है।
टीकाकरण प्रभारी डॉ. एनके पांडेय ने बताया कि जेई वैक्सीन का संकट हो गया है। यह वैक्सीन चीन से आती है। शासन को वैक्सीन का ऑर्डर भेजा गया है। आपूर्ति जल्द मिलने का आश्वासन मिला है। वैक्सीन मिलते ही नियमित टीकाकरण कराया जाएगा। बच्चों को टीकाकरण से सुरक्षा दी जाती है।