ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, दिवाली के दिन ब्रह्ममुहूर्त में पितृगण एवं देवताओं का पूजन करें। संभव हो तो उपवास या फलाहार करके गोधूलि बेला में या वृष, सिंह, वृश्चिक आदि स्थिर लग्न में श्री गणेश कलश षोडश मातृका एवं महालक्ष्मी का षोडषोपचार पूजन करें। पूजन थाली में 26 दीये और एक अतिरिक्त चौमुखा दीप प्रज्ज्वलित कर दीपमालिका का पूजन करें।
गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति की चांदी आदि के सिक्के से पूजन करें। चौमुखा दीपक की रात भर जलने जलाने की व्यवस्था करें। अंत में दवात के रूप में माता काली, कलम बही के रूप में मां लक्ष्मी और सरस्वती तथा कुबेर की तुला रूप में पूजन करना फलदायी होगा।
पूजन मुहूर्त
- लक्ष्मी पूजन मुहूर्त- शाम 06:10 से 08:04 तक
- प्रदोष काल- 05:30 से 08:04
- मेष काल- 06:12 से 06:13
- वृषभ काल-06:13 से 08:08