पारिवारिक कलह हो या कम समय में बेहतर मुकाम पाने की प्रतिस्पर्धा, इसके शिकार युवा ज्यादा हो रहे हैं। छोटी-छोटी बात पर धैर्य खोकर गुस्से और आवेश में आकर आत्मघाती उठा ले रहे हैं। गोरखपुर में रविवार को एक युवक ने पारिवारिक कलह में ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली तो एक 16 साल के किशोर ने माता-पिता के झगड़े में धैर्य खो दिया और फंदे से झूल गया।
मानसिक रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि भागमभाग भरी जिंदगी में युवा तेजी से आगे निकलना चाहते हैं। इस प्रतिस्पर्धा में अवसाद में चले जाते हैं। अवसाद की जानकारी उनके घरवालों और उन्हें नहीं हो पाती है। फिर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। इस समय ज्यादातर मामले जहर खाने या फंदा लगाकर खुदकुशी के ही आ रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाएं
18 सितंबर: पिपराइच के मौलाखोर में युवक ने खुदकुशी कर ली
17 सितंबर: शाहपुर के जंगल सालिकराम में युवक ने फंदा लगाकर खुदकुशी की।
15 सितंबर: शाहपुर के हकीम नंबर दो में युवती ने फंदे से लटककर खुदकुशी
14 सितंबर: शाहपुर के तिनकोनिया नंबर एक विश्वनाथपुर कॉलोनी में किशोर ने फंदे से लटककर खुदकुशी की
2 सितंबर: कैंट इलाके के रेलवे स्टेशन पर स्थित एक होटल में रोडवेज कर्मी ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली।
7 अगस्त:बेलीपार के मलावं गांव में एक शख्स ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली
वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. गोपाल अग्रवाल ने बताया कि तनाव को सहन करने की क्षमता आज के युवाओं में बेहद कम है। प्रतिस्पर्धा में वह किसी भी मुकाम को कम समय में हासिल कर लेना चाहते हैं। दूसरा परिवार में होने वाले विवाद को भी नहीं झेल पा रहे हैं। ऐसे में वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं और इसकी जानकारी ना तो उन्हें हो पाती है और ना ही घरवालों को। फिर वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
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