पूछताछ में आरोपी हरीश ने बताया कि 20 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे वह, विजय प्रजापति और एक अन्य साथी जिसका नाम वह नहीं जानता, विजय उसे चाचा कहता है, साथ निकले थे। सभी राजू नयन सिंह के घर पर गए जहां पर दरवाजा खुलवाने के बाद उनकी पिटाई शुरू कर दी। पिता की पिटाई होने पर काजल उसका वीडियो बनाने लगी। विजय ने वीडियो बनाने से मना किया, जब नहीं मानी तो विजय प्रजापति ने अपने पास रखे तमंचे से गोली मार दी और हाथ से मोबाइल छीन लिया। गोली मारने के बाद सभी अलग-अलग निकले।
अंडरपास के पास तमंचे को मैंने प्लास्टिक में लपेटकर जमीन में दबा दिया था। फिर सहारनपुर चला गया। वहां से हरिद्वार, उत्तराखंड चेन स्नेचिंग के पुराने मामले में हाजिर होने गया था। वहां पर करोना टेस्ट भी करा लिया था लेकिन इसी बीच पता चला कि पुलिस उसे इनामी बनाकर खोज रही है। इस वजह से गोरखपुर अधिवक्ता के पास चला आया। इसके पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया।
विजय के साथ पांडेय ढाबा के पास लूट भी की थी
हरीश ने पूछताछ में बताया कि दो अगस्त को पांडेय ढाबा के पास विजय प्रजापति के साथ बैग लूट की घटना को भी अंजाम दिया था। जनसेवा केंद्र संचालक से 48 हजार 700 रुपये, एक लैपटॉप मिला था। रुपयों में से 22 हजार हिस्सा मिला था। जिसमें से 2550 रुपये बचे थे। विजय प्रजापति के साथ वह कई वारदात कर चुका है। बांसगांव की पहले हुई लूट की घटना में हरीश शामिल था।
गोरखपुर, हरिद्वार समेत दर्ज हैं 13 मुकदमे
पकड़े गए हरीश पर गोरखपुर के अलावा उत्तराखंड के हरिद्वार में भी केस दर्ज है। उस पर अब तक 13 मुकदमे दर्ज हैं। बांसगांव में 2018 में लूट, 2019 में लूट, हत्या की कोशिश, 2018 में बेलीपार में लूट, तिवारीपुर में लूट, गोला में लूट, 2019 में गगहा में लूट, 2018 में गगहा में लूट, गगहा से गैंगस्टर, फिर 2021 में गगहा में लूट, गगहा में हत्या, आपराधिक साजिश, हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट, हरिद्वार के ज्वालापुर में लूट का केस दर्ज है।
एडीजी जोन अखिल कुमार ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में गगहा पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। बीट पुलिसिंग लागू नहीं की गई थी। ऑपरेशन तमंचा, ऑपरेशन दस्तक के तहत भी कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। इस वजह से थानेदार को हटाने का निर्देश एसएसपी को दिया गया है। इसके साथ ही सीओ बांसगांव से स्पष्टीकरण मांगकर उन पर दंडात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।