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CM Yogi visit: सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर में की कलश स्थापना, मां शैलपुत्री को पूजा

Thu, 07 Oct 2021 08:55 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

योगी आदित्यनाथ नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापित करेंगे। वह नौ दिन व्रत रहेंगे। सुबह-शाम शक्ति पीठ के पास दुर्गा सप्तसती का पाठ करेंगे। 
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गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर पहुंचे। सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर में बाबा गोरखनाथ का दर्शन-पूजन करने के साथ ही अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर उनका आशीर्वाद लिया। सीएम योगी यहां कलश स्थापित किया।
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नवरात्रि में गोरक्षपीठाधीश्वर की शक्तियों की आराधना का विशेष महत्व होता है। गोरक्षपीठ का जो भी पीठाधीश्वर रहा है वह नौ दिन तक शक्ति की आराधना करते हैं। योगी आदित्यनाथ भी उसी परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करते हैं। वह नौ दिन व्रत रहते हैं। सुबह-शाम शक्ति पीठ के पास दुर्गा सप्तसती का पाठ करते हैं।  
 
गोरखनाथ मंदिर में पहले दिन की पूजा
नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में भैरो की अक्षत, पुष्प, माला, धूप, अगरबत्ती से पूजा होती है, फिर सभी संत एक साथ मंदिर से निकलते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर के साथ संस्कृत विद्यालय के आचार्य, छात्र व मंदिर के कर्मचारी घंटा के साथ शोभायात्रा में शामिल होते हैं। शोभायात्रा मंदिर से निकलकर भीम सरोवर तक जाती है। भीम सरोवर सप्त मोक्ष दायिका जल मौजूद है। गोरक्षपीठाधीश्वर या मंदिर के मुख्य पुजारी कलश में जल भरते हैं।
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वहां से शोभा यात्रा शक्ति पीठ पर आती है। पीठाधीश्वर गौरी-गणेश की पूजा करते हैं, फिर कलश स्थापित करते हैं। गोरखनाथ मंदिर के आचार्य अरविंद त्रिपाठी बताते हैं कि कलश स्थापना के बाद मंदिर में स्थापित मां भगवती की आराधना, मंदिर में स्थापित राम दरबार, कृष्ण दरबार की पूजा-अर्चना की जाती है। सप्तशती का पाठ होता है। सुबह-शाम पीठाधीश्वर भी सप्तशती का पाठ करते हैं। 

पहले नौ दिन एकांत में होती थी शक्ति पूजा
मुख्यमंत्री बनने से पहले गोरक्षपीठाधीश्वर नौ दिन शक्ति के पूजा- अर्चना के लिए व्रत रहते थे। एकांत में बैठकर शक्ति की आराधना करते थे। जब राष्ट्र व समाज की रक्षा परम आवश्यक हुई, तब परंपराओं को  भी तोड़ा है। शक्ति की उपासना में यह संदेश है कि मां भगवती के आठ हाथ हैं। यह हाथ शक्ति के प्रतीक हैं। सभी हाथों को मिला दें तो एकजुटता होगी और ताकत बढ़ेगी। इसका संदेश है कि एकजुटता से ही राष्ट्ररक्षा की जा सकती है। समाज की कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। समाज को जोड़ना भी उपासना है।
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