सिपेट संस्था विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग कराने के साथ ही साथ बेरोजगारों, अकुशल मजदूरों को रिसाइकिल प्लास्टिक वेस्ट से प्लास्टिक की कुर्सी, मेज, मग, गिलास, बोतले बनाने का प्रशिक्षण भी देती है। इसके अलावा जो लोग खुद का छोटा प्लांट डालना चाहते हैं उनकी भी यह संस्था मदद करती है।
डीएम के. विजयेन्द्र पांडियन ने बताया कि गोरखपुर में सेंटर खोलने के लिए सिपेट को 10 एकड़ जमीन दी जानी है। जमीन चिहिन्त कर ली गई है। जल्द ही इसके हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इंस्टीट्यूट खुलने से गोरखपुर ही नहीं बल्कि आस-पास के जिलों के भी विद्यार्थी प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स कर सकेंगे। जरूरतमंदों को अल्पकालीन रोजगार परक प्रशिक्षण भी मिलेगा।