सिंघड़िया क्षेत्र को हरित क्षेत्र से हटाकर आवासीय श्रेणी में शामिल करने के मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद वहां के बाशिंदों को राहत मिलने लगी है। जीडीए ने कुछ दिन पहले जहां ध्वस्तीकरण को लेकर जारी नोटिस को वापस लिया, वहीं अब मकान निर्माण के समय दर्ज हुए केस को वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
करीब 1200 मकानों पर वाद दाखिल हैं, जिन्हें बड़ी राहत मिलेगी। जीडीए के कर्मचारी सिंघड़िया के ऐसे मकानों की तस्वीरें लेकर जियो टैग भी कर रहे हैं। इसके बाद पक्षकारों को वाद स्थगित करने संबंधित राहत की नोटिस दी जाएगी।
गोरखपुर महायोजना 2031 लागू होने के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण हरित पट्टी एवं विनियमितीकरण की पत्रावलियों को अलग कर रहा है। महायोजना में 25 कॉलोनियों को विनियमित क्षेत्र से हटाकर आवासीय श्रेणी में शामिल कर दिया। इससे इन कॉलोनियों के करीब आठ से 10 हजार लोगों को राहत मिलेगी।
इसी के साथ जीडीए ने सिंघड़िया क्षेत्र के लोगों को भी इस अभियान में शामिल कर लिया है। इस क्षेत्र में करीब 1200 वाद दाखिल है। शनिवार को जीडीए की टीम ने सिंघड़िया पहुंच कर ऐसे मकानों को चिह्नित कर उनकी तस्वीर लेने के साथ जियो टैग भी किया। सभी मकानों का जियो टैग करने के बाद यथा स्थिति फाइल में अंकित कर पक्षकारों को उनके वादों को स्थगित किए जाने का लिखित नोटिस सौंपा जाएगा।
इनके मकानों की ली गई तस्वीरें
महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-2 के श्रवण नगर में भरत सिंह, अवधेश दुबे, सिंघड़िया महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर-2 में आरएन यादव, विनय कुमार मिश्रा, हरिशंकर, रणजीत, रामदेव, सुनीता चौबे, रितु सिंह, सुमन शाही, आलोक शाही, लक्ष्मी देवी, रमापति शुक्ला के भवनों की प्राधिकरण के अवर अभियंताओं ने तस्वीरें लीं और उन्हें जियो टैग किया। यही प्रक्रिया अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से की जा रही है।
जीडीए उपाध्यक्ष, आनंद वर्द्धन ने बताया कि विनियमित क्षेत्र में बने भवनों के मालिकों पर जो वाद दाखिल हुए थे, उसे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करा दी गई है। इसमें सिंघड़िया क्षेत्र भी शामिल किया गया है। नए निर्माण पर रोक रहगी।