पॉवर ऑफ अटार्नी को लेकर राजभवन ने 28 दिसंबर 2023 को नया अध्यादेश जारी किया था, जिसमें गैर परिवार से डीड होने पर बाजार मूल्य के हिसाब से स्टांप शुल्क अनिवार्य कर दिया गया। पहले 100 रुपये के स्टांप पर मान्य था, लेकिन यह आदेश निबंधन दफ्तरों में तीन जनवरी 2024 को पहुंचा।
छह दिनों की इस अवधि में ही पुराने नियम पर डीड बनवाकर स्टांप शुल्क की चोरी का बड़ा खेल हो गया। गोरखपुर मुख्यालय में करीब 23 मामले पकड़े गए हैं। सूत्रों की मानें तो तहसीलों में भी ऐसा खेल हुआ है, अगर जांच हो तो बड़ा पर्दाफाश हो सकता है।
निबंधन कार्यालय में स्टांप शुल्क की चोरी का बड़ा मामला तब सामने आया, जब अधिवक्ता पीपी पांडेय ने इसकी शिकायत जनसुनवाई पोर्टल पर की। इसके बाद जब जांच शुरू हुई तो 15 डीड में करीब 100 करोड़ रुपये कम स्टांप शुल्क जमा करने का मामला पकड़ा गया।
यह मामला नेपाल के एक थापा परिवार का था, जिसकी जमीन शहर में थी और इसे इलाहाबाद की फर्म एसआर सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड ने कराया था। इसके बाद अधिवक्ता ने ही फिर जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत कर दी।
इस मामले में भी जब जांच हुई तो पांच मामले सामने आए, जिसमें 200 करोड़ रुपये स्टांप शुल्क कम जमा किए गए। विभाग की ओर से अफसरों ने सभी मामलों में केस दर्ज करा दिया, लेकिन तहसीलों में इसकी जांच नहीं हुई। सूत्रों की मानें तो अगर शासनादेश जारी होने के बाद की डीड की जांच हो तो कुछ और मामले पकड़ में आ सकते हैं।
एआईजी स्टांप संजय दुबे का कहना है कि शिकायत के बाद डीड की जांच कराई गई थी। जितने मामले पकड़े गए थे, सभी में नियमानुसार स्टांप शुल्क की कमी का उल्लेख कर विभाग ने केस दर्ज कराया। अगर शिकायत आती है तो तहसीलों की भी जांच कराई जाएगी।