कर्मचारियों के वेतन से पीएफ अंशदान काटने के बाद भी जमा नहीं करने पर ईपीएफओ गोरखपुर परिक्षेत्र की शिकायत पर महराजगंज जिले के जेएचवी शुगर मिल गड़ौरा के मालिक चंदौली से सपा के पूर्व सांसद जवाहर लाल जायसवाल एवं गौरव जायसवाल के खिलाफ ठूठीबारी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। शुगर मिल प्रबंधन पर आरोप है कि उसने पहली अप्रैल-15 से प्रत्येक माह कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ अंशदान की कटौती की। लगातार पांच साल तक कटौती के बाद भी कर्मचारियों के ईपीएफ खाते में 80.77 लाख की रकम जमा नहीं की। ठूठीबारी थाने की पुलिस ने धारा 406, 409 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, पूर्वांचल चीनी मिल मजदूर यूनियन के अध्यक्ष डॉ. नवल किशोर मिश्र ने ईपीएफ आयुक्त से शिकायत दर्ज कराई थी कि जेएचवी शुगर मिल प्रबंधन ने 2015 से चीनी मिल कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ अंशदान की कटौती की पर इसे ईपीएफ खाते में जमा नहीं किया है। प्रबंधन ने इस तरह कर्मचारियों के भविष्य निधि पर डाका डालने के साथ ही ईपीएफ को भी गुमराह किया है। हालांकि इससे पूर्व ईपीएफ ने शुगर मिल प्रबंधन के खिलाफ 7ए के तहत नोटिस जारी किया था। इस पर सुनवाई चल रही है। नवागत आयुक्त अभयानंद तिवारी से यूनियन के अध्यक्ष ने मिलकर कर्मचारियों के भविष्य निधि की रकम जमा नहीं होने पर चर्चा की। इसके बाद आयुक्त ने उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श कर जेएचवी शुगर मिल के प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
ईपीएफ के श्रम प्रवर्तन अधिकारी तारकेश्वर तिवारी ने जेएचवी शुगर मिल प्रबंधन के जवाहर लाल जायसवाल व गौरव जायसवाल के खिलाफ ठूठीबारी थाने में कर्मचारियों के ईपीएफ अंशदान की रकम 80.77 लाख ईपीएफ खाते में जमा नहीं कराए जाने की तहरीर दी। मंगलवार को तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। आयुक्त ने महराजगंज के एसपी प्रदीप गुप्ता से बातचीत कर इस प्रकरण में सहयोग की अपील की। एसपी के निर्देश पर पुलिस भी इस मामले को लेकर सक्रिय हो गई है। इस संबंध में जेएचवी शुगर मिल संचालकों का पक्ष नहीं मिल सका है। पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।
गोरखपुर परिक्षेत्र कर्मचारी भविष्य निधि संगठन आयुक्त अभयानंद तिवारी ने कहा कि कर्मचारियों को धोखा देते हुए जेएचवी शुगर मिल के मालिक जवाहर लाल जायसवाल व गौरव जायसवाल ने कर्मचारियों के वेतन से अंशदान की कटौती कर ईपीएफओ में जमा नहीं कराया। शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। इस तरह कर्मचारियों को धोखा देने वाले अन्य संस्थानों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ताकि कर्मचारियों की भविष्य निधि में किसी तरह का अवरोध न उत्पन्न हो सके।