देवरिया में फतेहपुर सामूहिक हत्याकांड के आरोपियों की मकान पर बुलडोजर चलाने का तहसीलदार ने बुधवार को अंतिम फैसला दे दिया। उन्होंने सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से मकान और बाउंड्रीवाल बनाकर काबिज मृतक पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव के पिता अभयपुर गांव के रामभवन, गोरख और परमहंस पर जुर्माना लगाकर बेदखली का आदेश जारी कर फाइल दाखिल दफ्तर कर दिया।
आरोपियों के वकील फैसला सुनाने से पहले आरोपियों के बयान और लेखपाल से जिरह करने पर अड़े रहे, लेकिन सरकारी वकील ने सार्वजनिक भूमि पर पहुंचकर पैमाइश कराने और पैमाइश के दौरान आरोपियों के अधिवक्ताओं के मौजूद रह कर पूरी प्रक्रिया से अवगत होने की दलील दी। उन्होंने कहा कि जब मौके पर कोर्ट पहुंच कर पैमाइश कराई तो जिरह और बयान का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे में तहसीलदार मजिस्ट्रेट ने अपने अंतिम फैसले में बताया कि मौजा फतेहपुर में गाटा संख्या 2742 में अराजी संख्या 0.583 हेक्टेअर में 0.06 हेक्टेअर वन के खाते में दर्ज है। इस पर सात वर्ष के गांव के रामभवन पुत्र राजकुमार पक्की दीवाल और छप्पर डालकर अवैध रुप से काबिज है।
यह है भूमि की नवैयत
गाटा संख्या 2,725 का 0.045 हेक्टेयर भूमि में से 0.02 पर खलिहान दर्ज है। इस भूमि पर रामभवन दस साल से पक्की मकान और चहारदीवारी बनाकर काबिज है। गाटा संख्या 2,726 रकबा 0.02 हेक्टेयर ग्राम सभा की नवीन परती है। इस भूमि पर भी रामभवन की दस साल से पक्की मकान और बाउंड्रीवाल है। अराजी संख्या 2,693 रकबा 0.097 हेक्टेयर ग्राम सभा का खलिहान है। इस भूमि पर पांच साल से पक्का मकान बना कर अभयपुर गांव के परमहंस यादव अवैध रुप से काबिज है। अराजी संख्या 2,734 में रकबा 0.069 हेक्टेअर ग्राम सभा में खलिहान की भूमि दर्ज है, इस पर गोरख यादव पांच साल से पक्की दीवार और टीनशेड डालकर कब्जा किए हैं।
लेखपाल की रिपोर्ट और मौके का स्थलीय निरीक्षण व एसडीएम, तहसीलदार के नेतृत्व में दो बार सरकारी जमीनों की पैमाइश के बाद भी सरकारी जमीनों पर आरोपियों का अवैध कब्जा पुष्ट होने पर न्यायालय रामभवन का तीन जगह पर कब्जा पाए जाने पर 2.29520 रुपये जुर्माना और 15 रुपये निष्पादन शुल्क, गोरख पर 22800 रुपये और निष्पादन शुल्क पांच रुपये और परमहंस पर 30400 रुपये जुर्माना, पांच रुपये निष्पादन शुल्क के साथ सरकारी सार्वजनिक भूमि से बेदखली का आदेश जारी किया गया।
फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में करेंगे अपील
आरोपियों के वकील गोपी यादव ने कहा कि न्यायालय ने एकतरफा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने पीड़ित पक्ष का बयान नहीं लिया और ना ही रिपोर्ट करने वाले लेखपालों से जिरह कराई गई। कोर्ट का फैसला न्याय संगत नहीं है। फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की जाएगी।
जिरह और बयान का कोई औचित्य नहीं
सरकारी वकील अरुण कुमार राव ने कहा कि न्यायालय ने पूरी निष्पक्षता से जांच के बाद फैसला सुनाया है। दो बार राजस्व विभाग की टीम के साथ सरकारी जमीनों की पैमाइश कराई गई। तहसीलदार और एसडीएम के साथ प्रतिपक्षी पैमाइश के दौरान मौजूद रहे। ऐसे में जब मौके पर सुनवाई की गई तो जिरह और बयान का कोई औचित्य नहीं है।