गोरखपुर में बढ़ती ठंड और दिवाली के दौरान वायु में प्रदूषण बढ़ने से अस्थमा और सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के मरीजों को खतरा ज्यादा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग की ओपीडी में 40 से 50 फीसदी मरीज इन बीमारियों से परेशान होकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर नवंबर से लेकर जनवरी के बीच ऐसे मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी के मरीज इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतें। जरा सी लापरवाही से जान तक बन आती है। चिंता की बात यह है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों में से 10 से 15 प्रतिशत युवा हैं।
इन मरीजों को सलाह दी जा रही है कि अगर वे ठीक हैं और दवा बंद कर चुके हैं, तो तत्काल दवा शुरू कर दें। जो मरीज दवा की कम डोज ले रहे हैं उनकी डोज भी बढ़ाई जा रही है। साथ ही यह भी सलाह दी जा रही है कि इनहेलर अपने पास जरूर रखें। इस मौसम में करीब पांच से 10 प्रतिशत मरीजों को भर्ती तक करना पड़ रहा है।
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोहरे के बीच धुआं ज्यादा खतरनाक है। कोहरे के कारण धुआं वायुमंडल में ऊपर नहीं जा पाता है। इसकी वजह से धुआं कोहरे में मिश्रित हो जाता है। यह मरीजों पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। दिवाली के दौरान प्रदूषण ज्यादा फैलता है। ऐसे में अस्थमा, एलर्जी और सीओपीडी के मरीज इस मौसम में दवा बिल्कुल न बंद करें। अगर दवा बंद कर देते हैं तो ऐसे मरीजों को भर्ती करने की नौबत आ जाती है। उन्होंने कहा कि बहुत जरूरी न हो तो ऐसे मरीज घरों में ही रहकर ठंड और प्रदूषण से बचने का प्रयास करें।